दिल्ली सरकार छात्राओं की शिक्षा को अधिक सुलभ, सुरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुक्रवार, 31 जुलाई से ‘विद्या वाहिनी’ साइकिल वितरण योजना की शुरुआत करेगी। वहीं दिल्ली सरकार राजधानी में भूमि और संपत्ति प्रबंधन को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और विवाद मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार जल्द ही ‘दिल्ली लैंड रिकॉर्ड बिल-2026’ विधानसभा में पेश करेगी। विद्या वाहिनी साइकिल की शुरूआत कल मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ईस्ट विनोद नगर स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होकर पहले चरण में कक्षा 9 की 3,000 छात्राओं को साइकिलें वितरित करेंगी। जानकारी के अनुसार अगले एक माह के भीतर राजधानी में करीब 1.40 लाख छात्राओं को चरणबद्ध तरीके से ‘विद्या वाहिनी’ साइकिलें उपलब्ध कराई जाएंगी। इस योजना का उद्देश्य छात्राओं के लिए विद्यालय तक पहुंच आसान बनाना, नियमित उपस्थिति बढ़ाना और परिवहन संबंधी कठिनाइयों के कारण होने वाले ड्रॉपआउट को कम करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार का संकल्प है कि कोई भी बेटी सिर्फ दूरी, संसाधनों की कमी या परिवहन की समस्या के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि ‘विद्या वाहिनी’ केवल एक साइकिल नहीं, बल्कि बेटियों के आत्मविश्वास, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक है। सरकार चाहती है कि हर छात्रा निर्भय होकर विद्यालय पहुंचे और अपने सपनों को साकार कर सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से छात्राओं की शिक्षा में निरंतरता आएगी, समय की बचत होगी और परिवारों पर आने वाला परिवहन का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी कम होगा। शिक्षा विभाग योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी सरकारी स्कूलों के साथ समन्वय कर रहा है।
दिल्ली की हर संपत्ति को मिलेगा ‘प्रॉपर्टी आधार कार्ड अब दिल्ली की प्रत्येक आवासीय, व्यावसायिक और अन्य संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वे कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा तथा हर संपत्ति को एक यूनिक प्रॉपर्टी आईडी के साथ ‘प्रॉपर्टी आधार कार्ड’ जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जिस तरह आधार कार्ड ने प्रत्येक नागरिक की पहचान को एक विश्वसनीय स्वरूप दिया है, उसी तरह अब हर संपत्ति की भी प्रमाणिक और सुरक्षित डिजिटल पहचान होगी। इसके लिए सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने बताया कि पहले चरण में केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत दिल्ली के 30 ग्रामीण गांवों में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सहयोग से ड्रोन सर्वे कर स्मार्ट प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किए गए हैं। इस पायलट परियोजना की सफलता के बाद अब पूरी दिल्ली में व्यापक सर्वेक्षण कराया जाएगा। नई व्यवस्था में भवनों के प्रत्येक तल तक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे कोई भी संपत्ति रिकॉर्ड से बाहर नहीं रहेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, दशकों से स्पष्ट भूमि रिकॉर्ड के अभाव में लोगों को खरीद-बिक्री, उत्तराधिकार, बैंक ऋण, नक्शा स्वीकृति और स्वामित्व से जुड़े विवादों का सामना करना पड़ता रहा है। डिजिटल रिकॉर्ड बनने से इन समस्याओं में कमी आएगी और सरकारी सेवाएं अधिक पारदर्शी एवं तेज होंगी।






