2026 के नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान आज नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प करीब 8 साल से नोबेल मांग रहे हैं। उनके लिए नोबेल शांति पुरस्कार की चर्चा 2018 में तेज हुई थी। उस वक्त ट्रम्प ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से बातचीत की थी। ट्रम्प के समर्थकों ने इसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिश बताया। जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भी कथित तौर पर ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया था। इस बार ट्रम्प के साथ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, पोप लियो XIV और यहां तक कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का नाम भी चर्चा में है। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होगी। 2018 से नोबेल प्राइज मांग रहे ट्रम्प 2025 की विजेता ने अपना नोबेल ट्रम्प को सौंपा पिछले साल भी ट्रम्प ने कई बार नोबेल देने की मांग की थी। उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत 8 युद्धों को रोकने का दावा किया। ट्रम्प खुद कई बार कह चुके हैं कि उन्होंने शांति के लिए काम किया है और उन्हें नोबेल मिलना चाहिए। 2025 का पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को मिला। बाद में मचाडो ने अपना नोबेल मेडल ट्रम्प को सौंप दिया। उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के लिए ट्रम्प के समर्थन के सम्मान के तौर पर बताया। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम क्यों आया इस साल की नोबेल रेस में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम सबसे अलग है। ISS पर अमेरिका, रूस, फ्रांस और कनाडा के अंतरिक्ष यात्री साथ काम करते हैं। धरती पर इन देशों के बीच राजनीतिक तनाव और मतभेद हैं, लेकिन अंतरिक्ष स्टेशन पर उनके वैज्ञानिक एक साथ काम करते हैं। ओस्लो पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक हाकोन जेरलोव ने इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण बताया है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में मौजूद है। यह करीब 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता है। सूडान का आम लोगों का नेटवर्क भी दावेदार सूडान के इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स (ईआरआर) का नाम भी प्रमुख दावेदारों में है। 2023 में सूडान में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद विदेशी राहतकर्मी बड़ी संख्या में देश छोड़कर चले गए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने खुद अपने इलाकों में राहत का काम संभाला। उन्होंने सामुदायिक रसोई और क्लिनिक चलाए। विदेश में रहने वाले सूडानी लोगों ने भी पैसे भेजकर इन अभियानों की मदद की। अंतरराष्ट्रीय सहायता कम होने के बावजूद यह नेटवर्क लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाता रहा। शांति का नोबेल स्वीडन की बजाय नॉर्वे में क्यों? नोबेल के बाकी पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं, लेकिन शांति का नोबेल नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में दिया जाता है। इसकी वजह करीब 130 साल पुरानी है। यह व्यवस्था खुद अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में तय की थी। 1895 में लिखी अपनी वसीयत में नोबेल ने तय किया था कि शांति पुरस्कार का फैसला नॉर्वे की संसद द्वारा चुनी गई समिति करेगी। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक ही राजा के अधीन थे, हालांकि दोनों की अपनी संसद और अलग राजनीतिक व्यवस्था थी। नोबेल ने यह नहीं बताया था कि शांति पुरस्कार के लिए उन्होंने नॉर्वे को ही क्यों चुना।
नोबेल की 1896 में मौत हुई और 1901 से पुरस्कार दिए जाने लगे। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक संघ में थे। 1905 में दोनों देश अलग हो गए, लेकिन नोबेल की वसीयत में शांति पुरस्कार के लिए नॉर्वे को दी गई जिम्मेदारी जारी रही। इसी वजह से आज भी फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन, साहित्य और अर्थशास्त्र के नोबेल स्वीडन में, जबकि शांति का नोबेल नॉर्वे में दिया जाता है। ——————— ये खबर भी पढ़ें… 2026 का साहित्य नोबेल कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन को:ग्रीक-रोमन साहित्य को आधुनिक दुनिया से जोड़ा, चर्चित किताब ‘द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड’ कनाडा की लेखिका और कवयित्री ऐन कार्सन को 2026 का साहित्य नोबेल पुरस्कार दिया गया है। नोबेल समिति ने उन्हें ऐसी रचनाओं के लिए सम्मानित किया है, जिनमें उन्होंने पुराने यूनानी-रोमन साहित्य को आज की जिंदगी, प्यार, रिश्तों और दुख से जोड़ा। पूरी खबर यहां पढ़ें…
आज मिलेगा शांति का नोबेल,ट्रम्प 8 साल से मांग रहे:कनाडा के PM दावेदार, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम भी चर्चा में
By InstaKhabar
On: October 9, 2026 9:30 AM






