इंस्टाखबर देश राज्य विदेश क्रिकेट एंटरटेनमेंट टेक्नोलॉजी राजनीति बिजनेस सेहत

अमेरिका में डिजिटल पढ़ाई पर ज्यादा खर्च का उल्टा असर:एक्सपर्ट्स का दावा- लैपटॉप-टैबलेट पर जोर देने से जेन जी की काबिलियत घटी, कॉमन टेस्ट में स्कोर गिरे

On: February 23, 2026 1:53 PM
Follow Us:

अमेरिका ने स्कूलों में किताबों की जगह लैपटॉप-टैबलेट पर 2024 में 2.72 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर उल्टा पड़ा। न्यूरोसाइंटिस्ट जेरेड कूनी होर्वाथ के मुताबिक, तकनीक तक अभूतपूर्व पहुंच के बावजूद जेन जी पिछली पीढ़ियों के मुकाबले संज्ञानात्मक रूप से कम सक्षम दिख रहे हैं और कॉमन टेस्ट में भी स्कोर गिरे हैं। होर्वाथ ने अमेरिकी सीनेट को बताया कि पिछले दस सालों में बच्चों की सीखने और समझने की क्षमता कम हुई है। दुनियाभर के आंकड़ों के अनुसार, स्कूल में कंप्यूटर और स्क्रीन पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों के टेस्ट स्कोर खराब रहे हैं। उनके मुताबिक, पढ़ाई के दौरान तकनीक का बेरोकटोक इस्तेमाल और 2007 में आईफोन आने के बाद यह समस्या और गंभीर हो गई है, जिससे बच्चों की मानसिक एकाग्रता और सीखने की शक्ति पर बुरा असर पड़ा है। होर्वाथ ने कहा, यह बहस तकनीक को खारिज करने की नहीं है, बल्कि यह देखने की है कि शैक्षिक टूल्स को इंसानी सीखने के तरीके के साथ कैसे जोड़ा जाए। सोशल मीडिया और गेमिंग की लत से बच्चों में अवसाद सैन डिएगो स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जीन ट्वेंगे के अनुसार, अत्यधिक स्क्रीन टाइम बच्चों की एकाग्रता खत्म कर रहा है, जो सीखने की प्रक्रिया के लिए हानिकारक है। सोशल मीडिया और गेमिंग एप्स को जानबूझकर इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक बांधे रखें। नवंबर 2025 के एक अध्ययन के मुताबिक, टिकटॉक अपने सहज इस्तेमाल के कारण सबसे ज्यादा लत साबित हुआ है। इस डिजिटल लत के कारण बच्चों में अवसाद और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं, जिसके चलते मेटा और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर 1,600 से अधिक परिवारों और स्कूलों ने मुकदमे दर्ज कराए हैं। जेनरेटिव एआई का जेन-जी पर नकारात्मक प्रभाव जेन-जी पर जेनरेटिव एआई और गिरती मानसिक क्षमता का दोहरा दबाव है। स्टैनफोर्ड के अध्ययन के अनुसार, एआई के कारण शुरुआती स्तर की नौकरियों (एंट्री-लेवल) पर सबसे अधिक बुरा असर पड़ा है। न्यूरोसाइंटिस्ट होर्वाथ ने चेतावनी दी है कि सीखने-समझने की क्षमता में कमी केवल करियर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भविष्य की जटिल वैश्विक समस्याओं को सुलझाने की मानवीय शक्ति को भी कमजोर कर देगी। संकट का समाधान होर्वाथ ने सुझाव दिया है कि सरकार को क्लासरूम में केवल उन्हीं डिजिटल टूल्स की अनुमति देनी चाहिए जो वास्तव में प्रभावी साबित हों। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 तक अमेरिका के 17 राज्यों ने स्कूलों में फोन के इस्तेमाल पर सख्ती की है। होर्वाथ इसे बच्चों की नहीं, बल्कि सिस्टम की नीतिगत विफलता मानते हैं। उनका कहना है कि पूरी शिक्षा कंप्यूटर के भरोसे छोड़ना एक गलत प्रयोग था, और अब छात्रों को इस पर सवाल उठाने चाहिए।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

किश्तवाड़ में टेरर नेटवर्क का खात्मा:सेना बोली- 326 दिन तक ऑपरेशन चलाया, 7 आतंकी मारे, इनमें जैश कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल

कर्नाटक में दलित जोड़े को मंदिर जाने से रोका:आरोपी बोला- दलितों को घर में ही पूजा करनी चाहिए; 20 फरवरी को हिंदु-मुस्लिम विवाद हुआ

हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का असर:11वीं सदी के मठों में इस बार बर्फ का सूखा, 47% कम हुई बर्फबारी

ग्लोबल टूरिज्म 2026, दुनिया को मिलेंगे 4 सबसे भव्य म्यूजियम:लॉस एंजिलिस में ‘स्पेसशिप’, अबू धाबी में कांच के पुल पर गैलरी के साथ बेल्जियम में दिखेगा कार फैक्ट्री म्यूजियम

देश की सबसे अनूठी ऑटोमैटिक तकनीक वाली पहली पार्किंग:हैदराबाद के नामपल्ली में है ये पार्किंग, 10 मंजिलों में 250 कारें और 200 दोपहिया वाहन खड़े हो सकते हैं

मेडल के बड़े दावेदार एथलीटों के खराब प्रदर्शन की वजह:ओलिंपिक का ‘चोकिंग सिंड्रोम’; दुनिया के सबसे बड़े मंच पर चैम्पियंस को हरा देता है उनका अपना ही नर्वस सिस्टम

Leave a Comment