बिहार के पटना जिले के अथमलगोला थाना क्षेत्र में एक सात वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या की वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया है। पुलिस ने महज 12 घंटे में इस मामले का पर्दाफाश करते हुए गांव के ही एक किशोर और उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया है।
⚠️ घटना का विवरण
थाना क्षेत्र के करजान गांव में बुधवार की शाम यह दर्दनाक घटना घटी।
बच्ची रोज की तरह बकरी चराने खेत की ओर गई थी, लेकिन देर रात तक घर नहीं लौटी। परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी खोजबीन शुरू की, तभी खेत में एक बोरी में बंद शव मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।
🔍 पुलिस की जांच और गिरफ्तारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए अथमलगोला थाने, बख्तियारपुर थाने और बाढ़ डीएसपी-2 अभिषेक सिंह की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची।
एफएसएल और श्वान दस्ते को भी घटनास्थल पर बुलाया गया ताकि साक्ष्य जुटाए जा सकें।
साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने गांव के एक 17 वर्षीय किशोर को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना अपराध कबूल कर लिया।
उसने बताया कि जब बच्ची बकरी चराने आई थी, तो उसने उसे अपने निर्माणाधीन मकान में ले जाकर दुष्कर्म किया।
दुष्कर्म के बाद जब बच्ची ने विरोध किया, तो उसने उसके दोनों हाथ बिजली के तार से बांध दिए और करंट लगाकर उसकी हत्या कर दी।
🤫 मां की संलिप्तता
हत्या के बाद किशोर ने अपनी मां को पूरी बात बताई।
बेटे को बचाने के लिए मां ने अपराध छिपाने में उसकी मदद की। दोनों ने मिलकर शव को बोरी में भरकर धान के खेत में फेंक दिया, ताकि किसी को शक न हो सके।
🚓 पुलिस की सफलता
ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग ने गुरुवार को बताया कि यह पूरी तरह से एक ब्लाइंड केस था, लेकिन पुलिस की तेज़ कार्रवाई से सिर्फ 12 घंटे में मामला सुलझा लिया गया।
उन्होंने कहा कि अपराधी किशोर और उसकी मां को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
पुलिस की इस सफलता पर अथमलगोला थानाध्यक्ष नवीन कुमार सिंह और डीएसपी-2 अभिषेक सिंह को पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है।
😢 गांव में मातम और आक्रोश
घटना के बाद गांव में शोक और गुस्से का माहौल है।
लोगों का कहना है कि इतनी कम उम्र की बच्ची के साथ की गई यह दरिंदगी समाज के लिए शर्मनाक है और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
📌 निष्कर्ष
यह घटना न केवल इंसानियत को शर्मसार करती है, बल्कि समाज के सामने यह सवाल भी रखती है कि आखिर नाबालिगों में अपराध की यह प्रवृत्ति क्यों बढ़ रही है।
अथमलगोला की यह घटना मासूमों की सुरक्षा के लिए चेतावनी है कि अब समाज और प्रशासन दोनों को और अधिक सतर्क रहने की ज़रूरत है।




