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ब्रिटेन में भारतीय मूल की महिला के साथ दरिंदगी, हमलावर बोला – “वापस जाओ इंडिया”

On: October 27, 2025 8:43 AM
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ब्रिटेन में एक बार फिर नस्लभेद की शर्मनाक घटना सामने आई है। वॉल्सॉल (Walsall) के पार्क हॉल इलाके में भारतीय मूल की एक महिला के साथ बलात्कार किया गया। हमलावर ने न केवल उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, बल्कि उस पर नस्लीय टिप्पणी करते हुए कहा — “गो बैक टू इंडिया” यानी “वापस जाओ इंडिया।”

दरवाज़ा तोड़कर घर में घुसा दरिंदा

घटना शनिवार रात की बताई जा रही है। पीड़िता के घर का दरवाज़ा तोड़कर आरोपी अंदर घुस आया और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। महिला ने जैसे-तैसे पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने पूरे इलाके को घेर लिया।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी करीब 30 साल का गोरे रंग का युवक है, जिसके बाल छोटे हैं और उसने गहरे रंग के कपड़े पहन रखे थे। फिलहाल पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर जनता से मदद की अपील की है ताकि अपराधी की पहचान हो सके।

“यह सिर्फ अपराध नहीं, नस्लीय नफरत का चेहरा है”

वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस ने इस वारदात को “रेशियली मोटिवेटेड अटैक” यानी नस्लीय रूप से प्रेरित हमला बताया है। जांच टीम का कहना है कि यह अब तक की सबसे भयावह घटनाओं में से एक है।
स्थानीय संगठनों का मानना है कि महिला पंजाबी मूल की हो सकती है और घटना के वक्त आरोपी ने लगातार जातीय टिप्पणियाँ कीं।

दोहराई गई पुरानी त्रासदी

गौरतलब है कि इसी इलाके में कुछ सप्ताह पहले एक सिख महिला के साथ भी ऐसा ही अमानवीय व्यवहार हुआ था। लगातार हो रही इन घटनाओं ने भारतीय समुदाय में गहरा आक्रोश और डर पैदा कर दिया है।

समाज और पुलिस की प्रतिक्रिया

सिख फेडरेशन यूके सहित कई सामाजिक संगठनों ने पुलिस से दोषी को जल्द पकड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं ब्रिटेन की साख को ठेस पहुंचाती हैं और यह सवाल उठाती हैं कि क्या दक्षिण एशियाई मूल की महिलाएं यहां सुरक्षित हैं?

वहीं पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि पीड़िता को हर संभव सहायता दी जा रही है और अपराधी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

सवाल जो अब उठ रहे हैं

यह मामला सिर्फ एक महिला के साथ हुई दरिंदगी नहीं है, बल्कि ब्रिटेन में पनप रहे नस्लीय भेदभाव और घृणा का आईना है।
क्या आधुनिक ब्रिटेन अब भी रंग और मूल के आधार पर लोगों को बांटने वाली सोच से बाहर नहीं निकल पाया है?
क्या भारतीय या एशियाई मूल के लोगों के लिए वहां रहना दिन-प्रतिदिन और मुश्किल होता जा रहा है?

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