झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। मंगलवार की सुबह मासूम खेलते-खेलते ऐसी जगह पहुंच गई, जहां उसके कदमों ने मौत को छू लिया। माओवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोटक पर पैर पड़ते ही जोरदार धमाका हुआ, और सिर्फ कुछ ही पलों में 10 साल की नन्ही बच्ची की ज़िंदगी खत्म हो गई।
😢 जंगल में गूंजा धमाका, पलभर में मिट गई मुस्कान
यह दर्दनाक हादसा जराईकेला थाना क्षेत्र के दीघा–तिलापोसी जंगल में हुआ। मृतका की पहचान 10 वर्षीय सिरिया हेरेंज, पिता जयमसीह हेरेंज, निवासी दीघा गांव के रूप में की गई है।
जानकारी के अनुसार, सिरिया मंगलवार सुबह करीब 9 बजे अपनी सहेलियों के साथ जंगल में सियाल पत्ता तोड़ने गई थी। यह वही जंगल है, जो माओवादियों के पुराने ठिकानों में से एक माना जाता है।
जैसे ही सिरिया ने एक कदम आगे बढ़ाया, अचानक जमीन हिल उठी — और देखते ही देखते ज़ोरदार धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया।
धमाका इतना भयानक था कि बच्ची के शरीर के टुकड़े चारों ओर बिखर गए। आसपास मौजूद ग्रामीण दहशत में भागे, पर जब लौटे तो नज़ारा रोंगटे खड़े कर देने वाला था।
🚓 पुलिस और सीआरपीएफ ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही जराईकेला थाना पुलिस और सीआरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची। सुरक्षा बलों ने इलाके को घेरकर बच्ची के अवशेष बरामद किए और आसपास के क्षेत्र में तलाशी अभियान शुरू किया।
पुलिस ने बताया कि यह विस्फोट माओवादियों द्वारा सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए लगाया गया IED था, लेकिन दुर्भाग्यवश इसकी चपेट में निर्दोष बच्ची आ गई।
🔥 तीन सालों में 17 से ज्यादा जानें गईं IED ब्लास्ट में
सारंडा वन क्षेत्र और उसके आसपास के इलाके वर्षों से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहे हैं।
पिछले तीन वर्षों में इसी इलाके में 6 से अधिक सुरक्षा बल के जवान, 8 ग्रामीण, और कई वन्यजीव (3 हाथी और 1 जंगली सुअर) IED धमाकों में अपनी जान गंवा चुके हैं।
सुरक्षाबलों के मुताबिक, नक्सली अब जंगल के रास्तों, पगडंडियों और गांवों के किनारों पर सैकड़ों IED बिछा चुके हैं, जिससे ग्रामीण और बच्चे भी शिकार बन रहे हैं।
⚠️ ग्रामीणों में भय और आक्रोश
घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और गुस्से का माहौल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सारंडा को पूरी तरह “IED मुक्त क्षेत्र” घोषित किया जाए, ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों।
एक स्थानीय बुजुर्ग ने कहा,
“हमारे बच्चे अब जंगल जाने से डरते हैं। हर कदम पर मौत बिछी है, हम कब तक ऐसे ही जीते रहेंगे?”
🚨 पुलिस ने तेज किया सर्च ऑपरेशन
पुलिस और सीआरपीएफ ने जंगल के अंदर कई किलोमीटर तक सर्च अभियान चलाया। ड्रोन से भी इलाके की निगरानी की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि माओवादियों के खिलाफ लगातार अभियान जारी रहेगा, जब तक यह इलाका पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता।
💬 निष्कर्ष
सिरिया हेरेंज की मौत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि उस दर्दनाक सच्चाई की याद है जो झारखंड के घने जंगलों में रोज़ सांस ले रही है।
जहाँ माओवादी अपने “आंदोलन” के नाम पर बारूद बो रहे हैं, वहीं उन्हीं की वजह से निर्दोष बच्चे, ग्रामीण और जानवर मौत के मुंह में जा रहे हैं।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ा सबक है —
जब तक जंगलों से बारूद का जाल नहीं हटेगा, तब तक सारंडा की मिट्टी में मासूमों का खून यूँ ही मिलता रहेगा।




