नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जीएसटी 2.0 (GST 2.0) के तहत आम जनता को बड़ा तोहफा दिया है। 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाली नई दरों में रोजमर्रा की वस्तुएं जैसे दूध, दही, पनीर, घी और सूखे मेवे (काजू, बादाम, पिस्ता) सस्ते हो जाएंगे। हालांकि, सरकार ने लग्जरी आइटम और अहितकर वस्तुओं पर कर बढ़ा दिया है, जिससे कई चीजें महंगी होंगी।
दूध-दही और सूखे मेवे होंगे सस्ते
- UHT दूध अब पूरी तरह GST फ्री।
- मक्खन, पनीर और कंडेंस्ड मिल्क पर केवल 5% जीएसटी।
- पैकेज्ड नमकीन, भुजिया, पास्ता, इंस्टेंट नूडल्स, चॉकलेट, कॉफ़ी और स्नैक्स पर केवल 5% टैक्स।
- काजू, बादाम और पिस्ता पर टैक्स 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा, खासकर नवरात्रि और दिवाली सीजन में।
22 सितंबर से महंगी होने वाली 20 चीजें
| क्रम संख्या | वस्तुएं | पुरानी GST दर | नई GST दर |
|---|---|---|---|
| 1 | पान मसाला | 28% | 40% |
| 2 | सभी स्वादयुक्त/मीठे पानी (एरेटेड सहित) | 28% | 40% |
| 3 | अन्य गैर-अल्कोहलिक पेय | 18% | 40% |
| 4 | पौधों पर आधारित दूध पेय | 18% | 40% |
| 5 | कार्बोनेटेड फल पेय | 28% | 40% |
| 6 | कैफीनयुक्त पेय | 28% | 40% |
| 7 | कच्चा तंबाकू, तंबाकू अवशेष (पत्तियों को छोड़कर) | 28% | 40% |
| 8 | सिगार, चेरोट, सिगरिलोस, सिगरेट | 28% | 40% |
| 9 | अन्य निर्मित तंबाकू और विकल्प | 28% | 40% |
| 10 | तंबाकू/निकोटीन उत्पाद (बिना दहन के लिए साँस लेने वाले) | 28% | 40% |
| 11 | कोयला, ब्रिकेट्स, कोयले से बने ठोस ईंधन | 5% | 18% |
| 12 | लिग्नाइट (जेट को छोड़कर) | 5% | 18% |
| 13 | पीट (पीट लिटर सहित) | 5% | 18% |
| 14 | मेन्थॉल डेरिवेटिव्स (DTMO, DMO, पेपरमिंट तेल, स्पीयरमिंट तेल आदि) | 12% | 18% |
| 15 | बायोडीजल (OMCs को मिश्रण के लिए आपूर्ति को छोड़कर) | 12% | 18% |
| 16 | मोटरसाइकिल (350cc से ऊपर) | 28% | 40% |
| 17 | SUV और लक्जरी कारें | 28% | 40% |
| 18 | रिवॉल्वर और पिस्तौल | 28% | 40% |
| 19 | विमान (निजी जेट, बिजनेस विमान, हेलीकॉप्टर) | 28% | 40% |
| 20 | यॉट और मनोरंजन जहाज | 28% | 40% |
नतीजा
22 सितंबर से जहां दूध-दही, पनीर, घी और सूखे मेवे जैसे रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी, वहीं पान मसाला, तंबाकू, कोल्ड ड्रिंक, लग्जरी वाहन और प्राइवेट जेट जैसी वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। सरकार का मकसद एक तरफ आम जनता को राहत देना है, तो दूसरी तरफ विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर ज्यादा टैक्स लगाकर संतुलन बनाना है।




