तमिलनाडु की राजनीति एक बार फिर गर्म तवे पर आ गई है! पूर्व वन मंत्री और डीएमके के दिग्गज नेता के. पोनमुडी की धार्मिक टिप्पणी अब उन्हें भारी पड़ती दिख रही है। उन्होंने शैव और वैष्णव परंपराओं को लेकर जो आपत्तिजनक और अपमानजनक बातें कहीं थीं, उससे राज्य में सियासी तूफान खड़ा हो गया।
अब मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा –
“भारत विविध धार्मिक समुदायों का देश है, नेताओं को बोलते समय जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।”
🚨 क्या कहा था पोनमुडी ने?
पोनमुडी ने एक सार्वजनिक मंच से शैव और वैष्णव परंपराओं को लेकर कटाक्ष और विवादित बयान दिया था। इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं बुरी तरह आहत हुईं और सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विरोध शुरू हो गया।
⛔ पार्टी की कार्रवाई:
DMK ने डैमेज कंट्रोल करते हुए उन्हें तत्काल उप-महासचिव पद से हटा दिया और बयान से दूरी बना ली।
⚖️ अदालत का रुख:
मंगलवार को कोर्ट ने कहा कि ये मामला मात्र राजनैतिक बयानबाज़ी नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द पर चोट है। हालांकि फिलहाल कोर्ट ने मामला लंबित रखने का फैसला लिया है, लेकिन ये भी साफ कर दिया कि
“नेता किसी समुदाय को नीचा दिखाने वाले बयान न दें, वरना क़ानूनी नतीजे भुगतने होंगे।”
🔥 विपक्ष हमलावर:
भाजपा और एआईएडीएमके ने DMK पर हिंदू विरोधी मानसिकता का आरोप लगाते हुए मांग की कि पोनमुडी को पार्टी से निष्कासित किया जाए और गिरफ्तार किया जाए।
📢 राजनीति में अब ‘जुबान की गर्मी’ पड़ सकती है बहुत भारी!
कोर्ट भी कह रहा – धर्म पर बोलो, तोल कर बोलो!






