भुवनेश्वर | फकीर मोहन स्वायत्त कॉलेज, बालेश्वर की एक छात्रा की हालत इस वक्त नाजुक बनी हुई है। बताया गया है कि छात्रा के शरीर का 95 फीसदी हिस्सा जल चुका है। उसकी सांस की नली, फेफड़े, दिल और गुर्दे तक गंभीर रूप से प्रभावित हैं। एम्स भुवनेश्वर के डॉक्टरों ने जानकारी दी कि अगले 24 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं।
दिल्ली एम्स से हो रही विशेषज्ञों की निगरानी
फिलहाल छात्रा को भुवनेश्वर के एम्स के बर्न सेंटर में भर्ती किया गया है। इलाज की निगरानी दिल्ली एम्स के तीन विशेषज्ञों की टीम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कर रही है। स्थिति गंभीर होने के कारण फिलहाल एयरलिफ्ट कर दिल्ली ले जाना संभव नहीं है, लेकिन जैसे ही हालत में सुधार होगा, उसे एयरलिफ्ट किया जाएगा।
इंटुबेशन से लेकर डायलिसिस तक – हर मिनट की जद्दोजहद
बर्न सेंटर के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय गिरि ने बताया कि छात्रा को अस्पताल पहुंचते ही इंटुबैट किया गया क्योंकि उसकी सांस की नली बुरी तरह झुलस चुकी थी। हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेवल सहित सभी महत्वपूर्ण पैमानों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। रविवार शाम से डायलिसिस शुरू कर दिया गया है, क्योंकि शरीर में पानी की भारी कमी के चलते अंगों पर असर पड़ा है। फिलहाल छात्रा को आईसीयू में रखा गया है और 10 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी देखरेख में जुटी है।
दिल्ली से मिल रही चिकित्सा सलाह के अनुसार हो रहा इलाज
एम्स भुवनेश्वर के डॉक्टरों ने बताया कि दिल्ली एम्स के विशेषज्ञों से सलाह के अनुसार ही इलाज हो रहा है। फिलहाल छात्रा की हृदय गति 180 BPM, ऑक्सीजन स्तर 98%, और ब्लड प्रेशर 136/61 रिकॉर्ड किया गया है। हेमोडायनामिक मॉनिटरिंग लगातार जारी है।
मुख्यमंत्री ने जताई कड़ी नाराज़गी, अस्पताल जाकर की मुलाकात
दिल्ली से लौटते ही ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सीधे भुवनेश्वर एम्स पहुंचे और पीड़िता के माता-पिता से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने डॉक्टरों से छात्रा की हालत की जानकारी ली और कहा कि राज्य सरकार इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी।
मुख्यमंत्री ने घटना की निंदा करते हुए कहा,
“यह अमानवीय घटना है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से एक जांच समिति गठित की गई है। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर अनुकरणीय कार्रवाई होगी। हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में किसी भी शैक्षणिक संस्थान में ऐसी घटनाएं न हों।”
मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंहदेव, स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिग, उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज, और विधायक बाबू सिंह भी मौजूद थे।
सवाल बरकरार है: आखिर छात्रा को इस हद तक क्यों जाना पड़ा?
पूरा राज्य इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध है। कॉलेज प्रशासन, पुलिस और सरकार की ओर से जांच जारी है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि एक छात्रा को ऐसा खौफनाक कदम उठाने पर किसने और कैसे मजबूर किया? क्या कॉलेज में उत्पीड़न या मानसिक दबाव के हालात थे? इन सभी पहलुओं की जांच का इंतज़ार है।






