अपराधियों ने ध्यान भटकाकर अंजाम दी वारदात, घटना के बाद दोबारा लौटे बदमाश
नई दिल्ली।
देश की राजधानी में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां कुख्यात ठक-ठक गिरोह ने झारखंड कैडर के एक आईपीएस अधिकारी को अपना शिकार बना लिया। इस गिरोह ने न केवल लूटपाट की, बल्कि अधिकारी के चोटिल होने की परवाह किए बिना दुस्साहसिक अंदाज़ में वारदात को अंजाम दिया।
जानकारी के मुताबिक, आईपीएस अधिकारी दिल्ली में किसी निजी कार्य से आए थे और अपनी कार में बैठे हुए थे। तभी कुछ लोग उनकी कार की खिड़की पर तेज़ी से ठक-ठक करने लगे। पहले तो अधिकारी ने इसे सामान्य इशारा समझा, लेकिन जैसे ही उन्होंने कार का शीशा नीचे किया और बाहर झांका, बदमाशों ने झटपट उनका बैग लपक लिया।
उस बैग में करीब 95 हजार रुपये नकद, एक कीमती लैपटॉप, और कुछ ज़रूरी दस्तावेज़ थे। लूट के दौरान हुई खींचतान में अधिकारी को हल्की चोटें भी आई हैं। हैरान करने वाली बात ये रही कि लुटेरे वारदात को अंजाम देने के बाद कुछ ही देर में वापस उसी जगह पर लौट आए, शायद यह देखने के लिए कि कोई कार्रवाई हुई या नहीं।
दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया मामला
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस सक्रिय हो गई और एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का मानना है कि यह वारदात पूरी तरह से ठक-ठक गिरोह के स्टाइल में हुई है, जो लंबे समय से राजधानी और एनसीआर में एक्टिव है।
क्या होता है ठक-ठक गिरोह का तरीका?
यह गिरोह आमतौर पर गाड़ियों में बैठे लोगों को निशाना बनाता है। वे किसी न किसी बहाने से वाहन चालक का ध्यान भटकाते हैं — जैसे गाड़ी से तेल टपकने की बात, टायर पंचर होने का इशारा, या शीशे पर कोई चीज़ गिरा देना। जब व्यक्ति बाहर निकलता है या सतर्कता खोता है, तब गिरोह का दूसरा सदस्य बैग, मोबाइल या अन्य कीमती सामान लेकर भाग जाता है।
सवालों के घेरे में राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था
इस वारदात ने एक बार फिर दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक प्रशिक्षित आईपीएस अधिकारी तक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिक कैसे सुरक्षित महसूस करें?
पुलिस की अपील
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वाहन चलाते समय सतर्क रहें और किसी अजनबी के इशारे या बातों में न आएं। कोई संदिग्ध हरकत दिखे तो तुरंत 112 पर कॉल करें या नजदीकी थाने में सूचना दें।
यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि राजधानी में अब अपराधी इतने बेखौफ हो गए हैं कि वे वरिष्ठ अधिकारियों को भी निशाना बनाने से नहीं डरते।






