झारखंड के कोडरमा जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी स्कूल चंद्रावती स्मारक उच्च विद्यालय के शिक्षक अमित कपूर पर 12 वर्षीय छात्र की बेरहमी से पिटाई का आरोप लगा है। घटना इतनी गंभीर थी कि छात्र का कान का पर्दा फट गया और उसे 81-85% तक सुनने की क्षमता खोने का खतरा बताया जा रहा है।
परिजनों का आरोप है कि शिक्षक ने बच्चे पर जबरन हिंदी माध्यम में पढ़ने और अपने निजी कोचिंग सेंटर में पढ़ाई करने का दबाव बनाया। विरोध करने पर 7 जुलाई को कक्षा में थप्पड़ मारकर छात्र को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया।
घटना की पूरी कहानी
- तारीख: 7 जुलाई 2025
- स्थान: चंद्रावती स्मारक उच्च विद्यालय, डोमचांच थाना क्षेत्र, कोडरमा
- आरोप: जबरन हिंदी माध्यम में पढ़ाने और निजी कोचिंग में भेजने का दबाव
- परिणाम: शिक्षक के थप्पड़ से छात्र का कान का पर्दा फटा, गंभीर चोट
पीड़ित छात्र के पिता जितेन्द्र कुमार के अनुसार, उनका बच्चा अंग्रेजी माध्यम से पढ़ रहा था, लेकिन आरोपी शिक्षक ने जबरन उसका माध्यम हिंदी कर दिया। विरोध करने पर शिक्षक ने कक्षा में ही डांट-फटकार के बाद जोरदार थप्पड़ मारा, जिससे कान से खून निकलने लगा।
इलाज की स्थिति
घायल छात्र को पहले डोमचांच अस्पताल ले जाया गया, फिर सदर अस्पताल हजारीबाग और उसके बाद रांची RIMS में रेफर किया गया।
- डॉ. आर.के. चौधरी की रिपोर्ट के अनुसार, छात्र में 81-85% बहरेपन की संभावना है।
- डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए दिल्ली या AIIMS में रेफर करने की सलाह दी है।
आरोप: धमकी और समझौते का दबाव
परिजनों का दावा है कि आरोपी शिक्षक ने घटना को दबाने के लिए उनके घर जाकर धमकी दी और समझौते के लिए दबाव बनाया। यहां तक कि पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
शिकायत और कार्रवाई
- शिकायत दर्ज: कोडरमा पुलिस अधीक्षक, रांची एसएसपी और मुख्यमंत्री सचिवालय में
- मांग: आरोपी शिक्षक की तत्काल गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
- परिजनों का आरोप: कई बार गुहार लगाने के बाद भी अब तक न्याय नहीं मिला
मामले पर सवाल
यह घटना न केवल शिक्षक की जिम्मेदारी और आचार संहिता पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कई बार सरकारी स्कूलों में छात्रों के अधिकार और सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया जाता।
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे अपने बच्चे के इलाज और न्याय के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की धीमी कार्रवाई से वे बेहद निराश हैं।






