सदर तहसील बरेली में एंटी करप्शन टीम ने चकबंदी विभाग के एक ड्राफ्टमैन को 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने और 5 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई तब हुई जब एक दिव्यांग व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि नक्शा दुरुस्तीकरण के लिए अधिकारी ने उससे मोटी रकम की मांग की थी।
कैसे हुआ पूरा मामला?
कैंट थाना क्षेत्र के भरतौल गांव निवासी जितेंद्र बाबू, जो दिव्यांग हैं, उन्हें नक्शा दुरुस्तीकरण (तूताबंदी) का काम करवाना था। इस सिलसिले में वे सदर तहसील पहुंचे, जहां चकबंदी विभाग में तैनात ड्राफ्टमैन राजीव मित्तल ने उनसे काम कराने के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की।
- आरोपी ने कहा कि यह काम वास्तव में 10 हजार से भी अधिक का है, लेकिन दिव्यांग होने के कारण वह “रियायत” देते हुए 10 हजार में कर देगा।
- तय हुआ कि 5 हजार रुपये पहले और बाकी 5 हजार रुपये काम पूरा होने के बाद दिए जाएंगे।
- जब पीड़ित ने बताया कि वह इतनी बड़ी रकम का इंतजाम नहीं कर सकता, तो आरोपी ने साफ कह दिया कि बिना पैसे के काम नहीं होगा।
शिकायत और कार्रवाई
दिव्यांग जितेंद्र बाबू ने हिम्मत दिखाते हुए पूरे मामले की शिकायत एंटी करप्शन टीम से की। शिकायत की जांच की गई, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद एंटी करप्शन टीम ने योजना बनाकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने का ट्रैप बिछाया।
जैसे ही ड्राफ्टमैन ने पहली किस्त के रूप में 5 हजार रुपये लिए, टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी पर आरोप
गिरफ्तार ड्राफ्टमैन राजीव मित्तल पर आरोप है कि वह लंबे समय से ऐसे मामलों में काम कराने के बदले रिश्वत मांगता था। इस बार उसने एक दिव्यांग की मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश की।
पुलिस और प्रशासन का रुख
एंटी करप्शन टीम ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। टीम का कहना है कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई अधिकारी जनता से इस तरह की अवैध वसूली न कर सके।
नतीजा
यह कार्रवाई प्रशासन के लिए एक संदेश है कि रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं, यह मामला दिखाता है कि शिकायत और साहस के दम पर भ्रष्टाचारियों को पकड़वाना संभव है।






