एक तरफ 23 सितम्बर को गिरा, दूसरी तरफ आज फिर बैठ गया – और भ्रष्टाचार अब भी खड़ा है!
📌 खबर क्या है?
हजारीबाग का सिंघरावां फ्लाईओवर, जिसे करोड़ों रुपये खर्च करके “जनता के विकास” के नाम पर बनाया गया था, वो मानो मोनसून की हर टेस्ट सीरीज में फेल हो रहा है।
- 23 सितम्बर को फ्लाईओवर का एक हिस्सा धड़ाम से गिरा।
- और आज, कुछ ही दिनों बाद, दूसरी साइड भी बैठ गई।
- मतलब पुल नहीं टूटा, बल्कि भ्रष्टाचार की पोल खुली है।
🌧️ बारिश का बहाना या भ्रष्टाचार की नमी?
सवाल ये है कि –
- क्या इतनी बारिश से सचमुच फ्लाईओवर ढह सकता है?
- या फिर सीमेंट में पानी से ज्यादा मिलावट और स्टील में लोहे से ज्यादा जंग पहले से ही भरी थी?
जनता का तंज:
“पुल था या पापड़, बारिश आते ही गल गया?”
💸 भ्रष्टाचार का कॉकटेल
फ्लाईओवर बना कैसे था, ये अब सबको पता चल गया है –
- ठेकेदार = कमीशन
- अधिकारी = सेटिंग
- क्वालिटी = गार्बेज
- रिजल्ट = फ्लाईओवर धड़ाम
और अब जांच कमेटी बैठेगी। जांच रिपोर्ट बनेगी।
फिर वही पुराना डायलॉग: “जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।”
लेकिन हकीकत में सबको सिर्फ “साफ-सुथरा क्लीन चिट” मिलेगा।
🤡 जनता की पीड़ा
- लोग पूछ रहे हैं – “अगर इतना घटिया काम ही करना था तो रेत-पत्थर का ढेर लगाकर बोर्ड क्यों नहीं लगा दिया – ‘आने वाले मानसून में गिरने वाला फ्लाईओवर’?”
- सरकार और सिस्टम पर भरोसा टूट रहा है, जैसे पुल टूटा।
“सिंघरावां फ्लाईओवर ने साबित कर दिया –
यहाँ पुल नहीं, भ्रष्टाचार की इमारत खड़ी की गई थी।
बारिश ने बस सच उजागर कर दिया।”






