हजारीबाग में वन भूमि और सरकारी ज़मीन की अवैध जमाबंदी से जुड़े बड़े घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने नेक्सजेन कंपनी के संचालक विनय सिंह को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी रांची से की गई और उसके खिलाफ कांड संख्या 11/2025 दर्ज की गई है।
🚨 मामला क्या है?
- यह घोटाला 2012–2013 के बीच का बताया जा रहा है।
- आरोप है कि उस दौरान हजारीबाग में गैर मजरूआ खास और वन भूमि को अवैध तरीके से दाखिल-खारिज (जमाबंदी) कर दिया गया।
- यह प्रक्रिया उस समय हुई जब IAS विनय चौबे हजारीबाग के उपायुक्त (DC) थे।
- जांच एजेंसियों को संदेह है कि इस अवैध कार्यवाही में सरकारी अधिकारियों और नेक्सजेन कंपनी के बीच सांठगांठ थी।
👤 कौन हैं विनय सिंह?
- विनय सिंह, नेक्सजेन कंपनी के मालिक हैं।
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका रिश्ता निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे से काफी करीबी बताया जा रहा है।
- शराब घोटाला जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि नेक्सजेन कंपनी की ओर से IAS चौबे की पत्नी स्वप्ना संचिता के खाते में करीब ₹1.26 करोड़ का ट्रांसफर किया गया था।
- इस पैसे को कंपनी की ओर से “कंसल्टेंसी फीस” कहा गया, लेकिन जांच एजेंसियों को इसके पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिले।
⚖️ जांच और कार्रवाई
- ACB ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और गिरफ्तारी के बाद अब आगे की पूछताछ जारी है।
- IAS विनय चौबे पहले से ही शराब घोटाले और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में जेल में बंद हैं और निलंबित हैं।
- अब वन भूमि घोटाले और नेक्सजेन के लेन-देन का खुलासा होने के बाद उनके खिलाफ कानूनी शिकंजा और कस सकता है।
- जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही विनय चौबे और सहयोगियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
🧩 बड़ी तस्वीर
यह घोटाला सिर्फ वन भूमि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ज़मीन, शराब कारोबार और अवैध संपत्ति अर्जित करने जैसे कई पहलुओं के तार जुड़ते दिख रहे हैं।
- अवैध जमाबंदी के कारण सरकार को भारी नुकसान हुआ।
- IAS स्तर के अधिकारी का नाम आने से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- विपक्षी दल और सामाजिक कार्यकर्ता इस मामले को “भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण” बता रहे हैं।
🔗 नतीजा
हजारीबाग का यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि कैसे प्रशासनिक तंत्र और निजी कंपनियों की मिलीभगत से सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जा कराया गया।
अब जब नेक्सजेन संचालक विनय सिंह की गिरफ्तारी हो चुकी है और IAS विनय चौबे पहले से जेल में हैं, ऐसे में आने वाले समय में इस घोटाले की परतें और खुलने की संभावना है।






