संसद के मानसून सत्र की बैठकें खत्म हुए करीब दो माह होने वाले हैं, लेकिन सत्र औपचारिक रूप से समाप्त नहीं हुआ। इसके बाद विशेष सत्र की अटकलें हैं। लोकसभा और राज्यसभा को 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था। मंगलवार तक सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं हुई। इस तरह दोनों सदन 54 दिन से बिना सत्रावसान के हैं। दोनों सदनों के एक साथ बिना सत्रावसान रहने की सबसे लंबी अवधि है। इससे पहले 1989 में दोनों सदन 53 दिन ऐसी स्थिति में रहे थे। तब 18 अगस्त को दोनों सदन स्थगित हुए और सत्रावसान किए बिना 11 अक्टूबर को उसी सत्र की बैठक दोबारा शुरू हुई थी। इस बार 54 दिन पूरे होने के बावजूद न बैठक बुलाई गई है और न सत्रावसान हुआ है। अध्यादेश का रास्ता बंद पर इस सत्र में बैठक संभव सत्रावसान नहीं होने से सरकार के पास जरूरत पड़ने पर इसी सत्र की बैठक दोबारा बुलाने का विकल्प खुला है। सत्तारूढ़ खेमे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में संसद की बैठक बुलाने की संभावनाओं को लेकर चर्चा है। राजनीतिक हलकों में परिसीमन, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े अगले कदमों की भी अटकलें हैं। हालांकि सरकार ने बैठक बुलाने या उसके एजेंडे की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। सत्रावसान न होने से इस सत्र की बैठक दोबारा बुलाई जा सकती है। मौजूदा स्थिति का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक असर अध्यादेश पर है। अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश तभी जारी हो सकता है, जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों। यानी सत्रावसान न होने तक अध्यादेश नहीं आ सकता है। एक्सपर्ट बोले- ठक का विकल्प खुला, अध्यादेश का रास्ता बंद संजय कुमार, राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक, सत्रावसान न होने से इस सत्र की बैठक दोबारा बुलाई जा सकती है। मौजूदा स्थिति का एक महत्वपूर्ण संवैधानिक असर अध्यादेश पर है। अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश तभी जारी हो सकता है, जब संसद के दोनों सदन सत्र में न हों। यानी सत्रावसान न होने तक अध्यादेश नहीं आ सकता है। लोकसभा में 114 घंटे में से 96 घंटे काम नहीं हुआ मानसून सत्र में लोकसभा की 19 बैठकें हुईं। सदन की सामान्य बैठक सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक होती है। दोपहर 1 से 2 बजे तक लंच ब्रेक रहता है। यानी एक दिन में करीब 6 घंटे कार्यवाही का समय होता है। इस हिसाब से 19 बैठकों में करीब 114 घंटे कार्यवाही होनी थी, लेकिन यह करीब 17 घंटे 30 मिनट ही चली। यानी करीब 96 घंटे 30 मिनट कम कार्यवाही हुई। वहीं, 2025 का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त 2025 तक चला था। इसमें लोकसभा और राज्यसभा की 21-21 बैठकें हुईं। लोकसभा में सिर्फ 37 घंटे काम हुआ था। राज्यसभा में 114 घंटे में से 76 घंटे 34 मिनट काम नहीं हुआ मानसून सत्र में राज्यसभा की बैठकें भी लोकसभा के बराबर रहीं और 114 घंटे कार्यवाही होनी थी, लेकिन राज्यसभा में लगभग 37 घंटे 24 मिनट काम हुआ। यानी करीब 76 घंटे 36 मिनट कम कार्यवाही हुई। मानसून सत्र में 12 नए बिल पेश, 11 दोनों सदनों में पास 2026 के मानसून सत्र में कुल 12 नए बिल पेश किए गए। इनमें 10 लोकसभा और 2 राज्यसभा में पेश हुए। लोकसभा में आए बिल टैक्स, बैंकिंग, खनन, ट्रिब्यूनल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, परीक्षा में नकल रोकने, केरल का नाम बदलने और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या जैसे मुद्दों से जुड़े हैं। माइंस एंड मिनरल्स संशोधन बिल के राज्यसभा से पास होने के बाद अब 12 में से 11 बिल दोनों सदनों से पास हो चुके हैं। केवल भारतीय सांख्यिकी संस्थान बिल अभी दोनों सदनों से पास नहीं हुआ है। राज्यसभा में पेश किए गए दोनों बिल भी लोकसभा से पास हो चुके हैं। ———– ये खबर भी पढ़ें… एक सत्र में बिल लाने-पास कराने का ट्रेंड बढ़ा:मानसून सत्र में 12 में से 11 पारित, 7 बिना चर्चा के ही 5 मिनट में पास संसद में बिल पेश करने और उन्हें पास कराने की रफ्तार पिछले एक साल में बढ़ी है। 18वीं लोकसभा के गठन के बाद से अब तक पेश किए गए 64 बिलों में से 34 यानी 53% बिल उसी सत्र में दोनों सदनों से पास हो गए, जिसमें उन्हें पेश किया गया था। यह आंकड़ा PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के सेशनवाइज डेटा से सामने आया है। पूरी खबर पढ़ें…
मानसून सत्र स्थगित होने के बाद भी खत्म नहीं हुआ:संसद 54 दिन से बिना बैठक के, 37 साल का रिकॉर्ड टूटा; विशेष सत्र की अटकलें
By InstaKhabar
On: October 7, 2026 9:26 AM






