केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधान के इस्तीफे लिए दीपके ने CJI सूर्यकांत का शुक्रिया अदा किया। दीपके बोले- अगर आपने हमें कॉकरोच न कहा होता, तो युवा सड़कों पर नहीं होते। प्रधान ने इस्तीफा न दिया होता। अभिजीत ने यह भी कहा- हम कॉकरोच हैं। एक बार घुस जाएं, तो आसानी से निकलते नहीं। अभी सिर्फ एक इस्तीफा हुआ है। कॉकरोच से पंगा मत लो। दरअसल, यह पूरी कहानी 72 दिन पहले CJI सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणी से शुरू हुई थी। 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में CJI की बेंच एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसी दौरान उन्होंने कहा था- कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं। कॉकरोच वाली टिप्पणी ने ही अनजाने में इस आंदोलन को इसकी पहचान देने वाला प्रतीक दिया था। विरोध का मजाक उड़ाने के लिए इस्तेमाल शब्द को छात्रों ने अपना लिया। सोशल मीडिया पर कॉकरोच इमोजी की बाढ़ आ गई, रातों-रात मीम्स बनने लगे, कलाकारों ने कार्टून बनाए और कैंपस में व्यंग्यात्मक पोस्टर घूमने लगे। दीपके ने इस अपमान को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ में बदल दिया, जो पहले एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया पेज के तौर पर शुरू हुई थी और बाद में छात्र आंदोलन का चेहरा बन गई। जब इसका एक सोशल मीडिया अकाउंट हटा दिया गया, तो यह “कॉकरोच इज बैक” नाम से दूसरे अकाउंट के साथ लौटा, जिसकी टैगलाइन थी – “कॉकरोच कभी नहीं मरते।” CJP ने सड़क नहीं, डिजिटल रास्ते को चुना अतीत के कई छात्र आंदोलनों के विपरीत, इसने सड़कों पर उतरने से पहले ऑनलाइन जोर पकड़ा। CJP तेजी से देश के सबसे बड़े डिजिटल समुदायों में से एक बन गया। आज CJP के इंस्टाग्राम पर लगभग 2.63 करोड़ (26.3 मिलियन) फॉलोअर्स हैं, जबकि कांग्रेस के लगभग 1.48 करोड़ (14.8 मिलियन) और BJP के 95 लाख (9.5 मिलियन) फॉलोअर्स हैं। अब पढ़ें, CJI सूर्यकांत का कमेंट और उसके बाद का पूरा घटनाक्रम… CJI का यह बयान सामने आया तो इसका विरोध होने लगा। नेताओं, लोगों और सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर आलोचना होने लगी। अगले ही दिन यानी 16 मई को CJI सूर्यकांत मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एक इवेंट में शामिल होने जबलपुर पहुंचे। वहां उन्होंने कॉकरोच वाले कमेंट पर सफाई दी। CJI सूर्यकांत ने कहा- यह कहना पूरी तरह बेबुनियाद है कि मैंने देश के युवाओं की आलोचना की। यह पढ़कर दुख हुआ कि मीडिया के एक हिस्से ने एक मामूली मामले की सुनवाई के दौरान मेरे ओरल कमेंट्स को गलत तरीके से पेश किया। मैंने उन लोगों की आलोचना की थी जो नकली और फर्जी डिग्री के साथ कानूनी पेशे में आए थे। लेकिन मामला बहुत आगे बढ़ चुका था। 16 मई को रात 12 बजे अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम का सोशल मीडिया पेज बना दिया। उस दिन से 25 जुलाई तक यानी करीब 72 दिन में इस बयान के बाद बनी CJP देश में सबसे ज्यादा चर्चा में रही। ऐसे बनी कॉकरोच जनता पार्टी 16 मई को रात 12 बजे अभिजीत दीपके ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम का सोशल मीडिया पेज बना दिया। इंस्टाग्राम पर भी अकाउंट बनाया। एक वेबसाइट भी बनाई गई। X पर एक गूगल फॉर्म जारी हुआ। इसमें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ लिखी एक तस्वीर के साथ कैप्शन था- ‘सभी कॉकरोचों के लिए एक नया प्लेटफॉर्म शुरू किया जा रहा है। अगर आप जॉइन करना चाहते हैं, तो लिंक पर क्लिक करें। पार्टी जॉइन करने के लिए 4 जरूरी योग्यताएं बताई गईं- ‘अनइम्प्लॉइड, लेजी, क्रॉनिकली ऑनलाइन, एबिलिटी टू रैंट प्रोफेशनली।’ इसके बाद लोग लगातार CJP से जुड़ रहे हैं। 17 से 20 मई तक कॉकरोच पार्टी के फॉलोअर्स लगातार बढ़े, लेकिन 21 मई को इसके अकाउंट बंद कर दिए गए। इसी दिन कॉकरोच इज बैक नाम से दूसरा अकाउंट बन गया। 22 मई को सबसे पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा गया। 24 मई को वेबसाइट पर ऑनलाइन पिटीशन जारी की गई। इस पर प्रधान के इस्तीफे की मांग करने वाले 10 लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। आज भी रजिस्टर्ड नहीं है CJP कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP औपचारिक रूप से चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड राजनीतिक दल नहीं है। इसकी वेबसाइट पर व्यंग्य में लिखा गया है कि ये कॉकरोचिस्तान के नो इलेक्शन कमीशन पर कॉकरोच एक्ट के तहत एक नॉन-रजिस्टर्ड पार्टी है। 30 साल के अभिजीत दीपके इसके फाउंडर हैं। वही दीपके जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के लीडर रहे हैं। ——————————— कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी भास्कर की ये खबरें भी पढ़ें…
दीपके बोले- हमें कॉकरोच कहने के लिए CJI का शुक्रिया:वरना आज प्रधान का इस्तीफा न होता; पंगा नहीं, कॉकरोच एक बार घुसा तो निकलता नहीं
By InstaKhabar
On: July 25, 2026 10:23 PM






