भारत के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ राजनेता सत्यपाल मलिक का आज निधन हो गया। वे 77 वर्ष के थे। उनके निधन से देश की राजनीति में एक बेबाक आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई है। सत्यपाल मलिक न केवल राज्यपाल के रूप में चर्चित रहे, बल्कि 1989 में अलीगढ़ से लोकसभा सांसद भी चुने गए थे।
🔹 1989 में की थी कांग्रेस को करारी शिकस्त
सत्यपाल मलिक का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से शुरू हुआ। 1989 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जनता दल के टिकट पर कांग्रेस की प्रत्याशी ऊषा रानी को हराकर संसद में कदम रखा। उन्होंने लगभग 78,000 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।
इस चुनाव में जनता दल की लहर थी और वी.पी. सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस विरोधी माहौल बना था। उसी दौर में मलिक एक उभरते हुए नेता के तौर पर सामने आए और उन्होंने 1989 से 1991 तक लोकसभा में अलीगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।
🔹 2014 में फिर से लड़ना चाहते थे अलीगढ़ से चुनाव
राजनीतिक गलियारों में 2014 लोकसभा चुनाव से पहले यह चर्चा जोरों पर थी कि सत्यपाल मलिक भाजपा के टिकट पर अलीगढ़ से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने खुद भी इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन अंतिम समय में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इस फैसले से वे थोड़े नाराज़ हुए, लेकिन उन्होंने पार्टी के खिलाफ कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया।
🔹 राज्यपाल के तौर पर निभाई अहम भूमिका
सत्यपाल मलिक को देश के विभिन्न राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया गया। वे बिहार, जम्मू-कश्मीर, गोवा और मेघालय जैसे संवेदनशील और विविध पृष्ठभूमि वाले राज्यों के राज्यपाल रहे।
👉 जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहते लिए गए बड़े फैसले
2018 से 2019 तक वे जम्मू-कश्मीर के अंतिम राज्यपाल रहे, जब तक कि इसे केंद्र शासित प्रदेश में परिवर्तित नहीं कर दिया गया। उनके कार्यकाल में ही अनुच्छेद 370 हटाने की नींव रखी गई।
उन्होंने कई बार केंद्र सरकार की आलोचना भी की, खासकर किसान आंदोलन, पुलवामा हमले और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर उन्होंने बेबाक राय रखी, जिससे वे सुर्खियों में रहे।
🔹 बेबाक बयानों के लिए थे जाने जाते
राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुए भी सत्यपाल मलिक ने कई बार ऐसी बातें कही जो सरकारों के लिए असहज थीं। वे स्पष्ट रूप से बोलने वाले नेता माने जाते थे।
उनका मानना था कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि सेवा होना चाहिए। यही कारण था कि वे कभी किसी दल विशेष के गुलाम नहीं बने और जनहित में बोलने से कभी नहीं कतराए।
✍️ निधन पर राजनीतिक गलियारों में शोक
सत्यपाल मलिक के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समेत कई दिग्गज नेताओं ने शोक जताया है। अलीगढ़ और मेरठ जैसे इलाकों में भी शोक की लहर है, जहां उन्हें जनता का अपार समर्थन मिला था।
🧾 संक्षिप्त में सत्यपाल मलिक का राजनीतिक सफर:
| वर्ष | उपलब्धि/पद | विवरण |
|---|---|---|
| 1989 | सांसद (अलीगढ़) | जनता दल के टिकट पर कांग्रेस को हराया |
| 2014 | भाजपा से टिकट की मांग | लेकिन टिकट नहीं मिला |
| 2017 | बिहार के राज्यपाल | संवैधानिक पदभार संभाला |
| 2018 | जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल | अनुच्छेद 370 हटाने से पहले की भूमिका |
| 2019-22 | गोवा व मेघालय के राज्यपाल | केंद्र-राज्य संबंधों पर मुखर रहे |
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