हिमाचल प्रदेश एक बार फिर कुदरत के कहर से कराह उठा है। मंडी जिले में बादल फटने से भारी तबाही मच गई। आठ दिन बाद जब प्रशासन जंजैहली पहुंचा, तो वहां का मंजर दिल दहला देने वाला था।
➡️ 466 मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त
➡️ 92 दुकानें तबाह
➡️ 53 लोग अब भी लापता – जिनका कोई सुराग नहीं
उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि सबसे पहले राहत और बचाव कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है। सड़कों को बहाल किया जा रहा है ताकि प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंच सके। साथ ही पेयजल योजनाओं को दुरुस्त करने की कवायद जारी है।
⛈️ मौसम विभाग ने अभी भी कुल्लू, मंडी, चंबा, कांगड़ा और शिमला जैसे जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। यानी खतरा अभी टला नहीं है!
स्थानीय लोगों ने लगाया आरोप – प्रशासनिक लापरवाही के चलते राहत पहुंचाने में देरी हुई, जिससे कई जिंदगियां खतरे में पड़ीं।
📍 अब सवाल ये उठता है – क्या पहाड़ों में हर साल की ये तबाही ‘नियति’ बन चुकी है? या हम इससे निपटने में अब भी तैयार नहीं हैं?











