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भूकंप से कांपी धरती: असम, उत्तराखंड और अंडमान-निकोबार में धरती ने ली अंगड़ाई, लोग घरों से भागे बाहर!

On: July 8, 2025 10:01 AM
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देश के कई हिस्सों में आज सुबह धरती ने हलचल मचाई, जब असम के कार्बी आंगलोंग ज़िले में 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। झटका इतना तेज़ था कि कई लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए। भूकंप का केंद्र जमीन से 25 किलोमीटर नीचे था, जिससे झटके ज्यादा गहरे और डरावने महसूस हुए।नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार यह भूकंप सुबह 9:22 बजे आया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले हल्की गड़गड़ाहट सुनाई दी, फिर फर्श और दीवारें हिलने लगीं। कुछ जगहों पर पंखे झूलते नजर आए और बर्तन खड़खड़ाने लगे।अचानक हिली ज़मीन, दहशत में लोगकार्बी आंगलोंग के कई इलाकों में लोग नमाज़ या नाश्ते की तैयारी में लगे थे कि तभी धरती की यह चेतावनी आई। “हमने पहले समझा शायद कोई भारी ट्रक गुजरा है, लेकिन फिर सब कुछ हिलने लगा। तुरंत बाहर भागे,” – स्थानीय निवासी संजय दास ने बताया।उत्तरकाशी में भी कांपी ज़मीनसिर्फ असम ही नहीं, हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं रहा। उत्तरकाशी ज़िले में आज 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। हालांकि इसकी तीव्रता कम थी, फिर भी यह लोगों को डरा गया, खासतौर पर 1991 के विनाशकारी भूकंप की यादें ताज़ा कर दीं।स्थानीय प्रशासन के अनुसार किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन एहतियातन कुछ स्कूलों में छुट्टी कर दी गई।अंडमान-निकोबार में भी धरती का गुस्साइससे एक दिन पहले अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में भी धरती ने हलचल दिखाई। लगातार छोटे झटकों ने यहां के निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल तेज़ हो गई है, जिससे अगले कुछ हफ्ते संवेदनशील हो सकते हैं।क्या कहते हैं भूवैज्ञानिक?भूकंप विज्ञानियों का मानना है कि भारत के उत्तर-पूर्वी, हिमालयी और द्वीप क्षेत्र बेहद संवेदनशील सिस्मिक ज़ोन में आते हैं। “इन इलाकों में टेक्टोनिक प्लेटें लगातार टकराती रहती हैं, जिससे समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। गहरी जमीन में आया भूकंप कम नुकसानदायक होता है, लेकिन इसकी चेतावनी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता,” – डॉ. अरविंद वर्मा, वरिष्ठ भूवैज्ञानिक।—सावधानी ही सुरक्षा है: ये कदम ज़रूर उठाएंझटकों के दौरान पैनिक न करें, खुले मैदान की ओर भागें।लिफ्ट का प्रयोग न करें, सीढ़ियों का उपयोग करें।दीवार, खिड़की, भारी फर्नीचर से दूर रहें।घरों में भूकंप के समय उपयोगी ‘इमरजेंसी किट’ ज़रूर रखें।—देश में लगातार महसूस किए जा रहे इन झटकों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रकृति के आगे इंसान कितना भी आधुनिक क्यों न हो, असहाय ही रह जाता है। फिलहाल राहत की बात ये है कि इन घटनाओं में अभी तक किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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