भारत में एक बार फिर खांसी की सिरप को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।
तमिलनाडु के कांचीपुरम में बनी Coldrif खांसी की सिरप के कारण 14 बच्चों की मौत होने के बाद जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
फैक्ट्री में 350 से ज्यादा नियमों का उल्लंघन, गंदगी, और जहरीले रसायनों का इस्तेमाल पाया गया है।
⚠️ कैसे खुला मामला?
कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कई बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी।
डॉक्टरों ने जब जांच की तो पाया कि उन बच्चों के गुर्दे फेल हो चुके थे।
सभी बच्चों ने एक ही खांसी की दवा पी थी — Coldrif Cough Syrup।
इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने तुरंत जांच शुरू कराई।
🏭 जांच में क्या-क्या निकला?
जांच टीम ने तमिलनाडु की उस फैक्ट्री में जाकर निरीक्षण किया जहां यह सिरप बनाई जाती थी — Sresan Pharmaceuticals Pvt. Ltd.
यहाँ जो स्थिति मिली, वह बेहद डराने वाली थी 👇
- फैक्ट्री में सफाई और हाइजीन का अभाव था।
- मशीनें पुरानी, जंग लगी और गंदी थीं।
- कच्चे माल को बिना जांचे ही दवाओं में मिलाया जा रहा था।
- पानी की गुणवत्ता की कोई टेस्टिंग नहीं की जाती थी।
- उत्पादन क्षेत्र में कीट और मक्खियाँ पाई गईं।
- कंपनी के पास न तो गुणवत्ता नियंत्रण (Quality Control) विभाग था, न ही कोई प्रशिक्षित केमिस्ट।
- कंपनी ने Propylene Glycol और Diethylene Glycol (DEG) जैसे रसायन गैरकानूनी तरीके से खरीदे और उपयोग किए।
☣️ क्या है ये Diethylene Glycol (DEG)?
यह एक औद्योगिक रसायन है, जिसका इस्तेमाल पेंट, ब्रेक ऑयल और प्लास्टिक में किया जाता है।
अगर यह गलती से दवा में मिल जाए तो गुर्दे, लीवर और दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है।
1990 से अब तक भारत समेत कई देशों में DEG से दूषित सिरप के कारण 400 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है।
🧾 फैक्ट्री में पाई गई 350 से ज्यादा खामियां
निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक:
- कुल 350 उल्लंघन दर्ज हुए — जिनमें 200 “गंभीर” और 150 “सामान्य” थे।
- दवा बनाने के लिए मानक प्रक्रिया (SOP) ही मौजूद नहीं थी।
- दवाओं को साफ बोतलों में नहीं, बल्कि खुले माहौल में पैक किया जा रहा था।
- वेस्ट केमिकल्स को सीधे ड्रेनेज में बहा दिया जाता था।
- कई कच्चे पदार्थों की बिलिंग और सोर्सिंग डॉक्यूमेंट्स ही नहीं मिले।
🧒 मौतों की पूरी कहानी
- मरने वाले ज्यादातर बच्चे 5 साल से कम उम्र के थे।
- डॉक्टरों ने बताया कि बच्चों में तेज उल्टी, पेशाब बंद होना और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखे।
- सभी बच्चों ने Coldrif सिरप पिया था।
- रिपोर्ट में पाया गया कि सिरप में जहरीले रसायन की मात्रा बहुत ज्यादा थी।
👮 कड़ी कार्रवाई शुरू
- फैक्ट्री को सील कर दिया गया है।
- कंपनी के मालिक और एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया है।
- सरकार ने कंपनी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला (मृत्यु का कारण बनने वाला अपराध) दर्ज किया है।
- मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और हरियाणा ने Coldrif सिरप की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
- केंद्र सरकार ने पूरे देश की खांसी की सिरप बनाने वाली कंपनियों की जांच के आदेश दिए हैं।
🧠 विशेषज्ञों का कहना है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार –
“यह सिर्फ एक कंपनी की गलती नहीं, बल्कि भारत में दवा निर्माण व्यवस्था की लापरवाही को दिखाता है।
अगर समय पर गुणवत्ता जांच होती, तो इतनी मौतें नहीं होतीं।”
📢 सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा –
“दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
यह मामला बच्चों की जान से जुड़ा है और इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
🧩 अब क्या कदम उठाए जा रहे हैं
- देशभर में दवा फैक्ट्रियों का निरीक्षण अभियान शुरू किया गया है।
- कच्चे माल के परीक्षण को अनिवार्य किया गया है।
- सिरप की लेबलिंग और चेतावनी (Warning Label) को नया फॉर्मेट दिया जाएगा।
- सरकार जल्द ही “राष्ट्रीय दवा सुरक्षा नीति” (National Drug Safety Policy) लाने की तैयारी में है।






