रांची। झारखंड भाजपा में संगठनात्मक सुस्ती अब चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। छह महीने बीत जाने के बाद भी पार्टी को नया प्रदेश अध्यक्ष नहीं मिल पाया है। फरवरी 2025 में नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन मामला अभी भी अधर में लटका हुआ है। हाईकमान लगातार बैठकें तो कर रहा है, लेकिन नाम तय करने को लेकर सहमति नहीं बन पा रही।
संगठन चुनाव की सुस्त चाल
भाजपा में संगठन चुनाव की प्रक्रिया मंडल स्तर से शुरू होनी थी, लेकिन अब तक अधिकांश मंडलों और जिलों की कमेटियों की घोषणा तक नहीं हो सकी है। कार्यकर्ताओं में असमंजस और बेचैनी साफ देखी जा रही है। जिला अध्यक्ष पद के लिए रायशुमारी भी लंबित है, जिससे प्रदेश संगठन के शीर्ष नेतृत्व का चुनाव लगातार टलता जा रहा है।
केंद्रीय चुनावों की व्यस्तता बन रही बाधा
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर चुनावों में व्यस्त है, जिससे झारखंड जैसे राज्यों के आंतरिक मामलों को प्राथमिकता नहीं मिल पा रही। आगामी मानसून सत्र तक नए अध्यक्ष की घोषणा की संभावना भी कम ही दिख रही है।
विपक्ष ने साधा निशाना
झामुमो और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने भाजपा की इस देरी को नेतृत्व संकट करार दिया है। झामुमो के एक प्रवक्ता ने कहा, “जो अपनी पार्टी में अध्यक्ष नहीं तय कर पा रहे, वो राज्य में स्थिरता कैसे लाएंगे?”
कौन होगा अगला चेहरा?
नामों की दौड़ में कई वरिष्ठ नेता चर्चा में हैं, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व की चुप्पी ने राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस बना रखा है। कुछ नाम संगठनवाद से आते हैं तो कुछ विधायकों को भी मौका दिए जाने की अटकलें हैं।
निष्कर्ष
भाजपा की रणनीति चाहे जो भी हो, लेकिन झारखंड इकाई में नेतृत्वविहीन स्थिति पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से चिंता का विषय बनती जा रही है। सवाल अब यही है — “आखिर कब तक तारीख पर तारीख मिलती रहेगी?”






