विदेश में नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर ठगी करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। यूपी एसटीएफ (नोएडा यूनिट) ने इस मामले में मुख्य आरोपी हर्षवर्धन जैन को गिरफ्तार किया है, जो खुद को माइक्रोनेशन्स जैसे West Arctica, Saborga, Poulvia और Lodonia का ‘राजदूत’ बताता था। आरोपी ने गाजियाबाद में बाकायदा एक ‘फर्जी दूतावास’ खोल रखा था, जिसमें इंटरव्यू, वीज़ा प्रोसेसिंग और नियुक्ति की रस्में भी होती थीं।
कैसे चल रहा था ठगी का खेल?
हर्षवर्धन जैन ने कुछ ऐसे देश चुने जिनके बारे में आम लोग कम जानते हैं या जिनका अस्तित्व ही स्पष्ट नहीं है। इनका नाम इस्तेमाल कर वह भोले-भाले बेरोजगारों को विदेश में ‘गवर्नमेंट जॉब’ या ‘राजनयिक पद’ का ऑफर देता था। इसके बदले में हर कैंडिडेट से 5 लाख से लेकर 15 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।
फर्जीवाड़े की पूरी स्क्रिप्ट तैयार
आरोपी ने एक आलीशान ऑफिस को “दूतावास” का रूप दे रखा था, जहां इंटरव्यू बोर्ड, नकली विदेशी अधिकारी, और विदेश मंत्रालय के नकली दस्तावेज़ भी मौजूद थे। लोगों को विश्वास दिलाने के लिए नकली आईडी कार्ड, वीज़ा स्टिकर, और यहां तक कि फर्जी फ्लाइट टिकट भी दिए जाते थे।
अब तक सैकड़ों लोग बने शिकार
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले दो वर्षों से सक्रिय था और देशभर के अलग-अलग राज्यों से सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। कई पीड़ितों ने नौकरी मिलने की उम्मीद में अपनी जमीन और गहने तक बेच दिए।
एसटीएफ की कार्रवाई और आगे की जांच
यूपी एसटीएफ ने गुप्त सूचना के आधार पर गाजियाबाद स्थित फर्जी दूतावास पर छापा मारा और हर्षवर्धन को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से कई फर्जी दस्तावेज, पासपोर्ट की कॉपियां, नकली मुहरें और लाखों की नकदी बरामद हुई है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है।
निष्कर्ष:
गाजियाबाद में फर्जी दूतावास खोलकर चल रहा यह हवाला और ठगी रैकेट न सिर्फ बेरोजगारों की भावनाओं से खेल रहा था, बल्कि देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन चुका था। एसटीएफ की तत्परता से एक बड़ा गिरोह अब कानून के शिकंजे में है।
अगर आप भी किसी विदेशी नौकरी के ऑफर के संपर्क में हैं, तो दस्तावेज़ों और स्रोतों की सावधानीपूर्वक जांच करें। सपना देखने में बुराई नहीं, मगर आंख मूंदकर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।






