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दिल्ली के बीचोंबीच चल रही थी “नकली ENO फैक्ट्री”! हज़ारों पाउच जब्त — क्या हमारे बाज़ार में मिल रहा है जहर?

On: October 26, 2025 5:45 PM
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दिल्ली के बीचोंबीच चल रही थी “नकली ENO फैक्ट्री”! हज़ारों पाउच जब्त — क्या हमारे बाज़ार में मिल रहा है जहर?

राजधानी दिल्ली में पुलिस ने एक ऐसी नकली फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है, जहाँ ENO जैसे मशहूर ब्रांड के नाम पर धड़ल्ले से नकली पाउडर तैयार किया जा रहा था। छापेमारी के दौरान हज़ारों पैकेट, कच्चा माल, पैकिंग मशीनें और फर्जी ब्रांड लेबल बरामद किए गए। दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है — लेकिन बड़ा सवाल ये है कि, क्या यह खेल सिर्फ दो लोगों तक सीमित है?


🧾 “फ्रेशनेस” के नाम पर मिल रहा था धोखा

ENO जैसे ब्रांड का इस्तेमाल लोगों के पेट की राहत से जुड़ा होता है, लेकिन अब यही नाम बन गया है मुनाफ़े के लालच में जहर बेचने वालों का हथियार। बरामद पाउच दिखने में बिल्कुल असली ENO जैसे थे — लेकिन उनके अंदर भरा गया पाउडर, ना तो किसी लैब में टेस्ट हुआ, ना किसी कंपनी की मंज़ूरी से बना।


⚙️ कैसे चलता था पूरा रैकेट?

जांच में सामने आया कि यह फैक्ट्री काफी समय से चल रही थी।

  • स्थानीय स्तर पर कच्चा माल लाया जाता था।
  • पैकिंग मशीन से ENO के नाम पर पाउच बनाए जाते थे।
  • और फिर यह नकली पाउडर थोक दुकानों और छोटी मेडिकल शॉप्स में पहुंचाया जा रहा था।

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क किन-किन शहरों तक फैला है और क्या इससे जुड़े और लोग भी हैं।


❓ अब उठते हैं कुछ बड़े सवाल…

  1. कितने लोग अब तक नकली ENO का शिकार बन चुके हैं?
  2. ब्रांड कंपनी को इतनी बड़ी फर्जीवाड़े की भनक क्यों नहीं लगी?
  3. स्थानीय प्रशासन की निगरानी में इतनी बड़ी यूनिट कैसे चलती रही?
  4. क्या यह गिरोह सिर्फ दिल्ली तक सीमित है या देशभर में जड़ें फैली हैं?

🚨 क्या सरकार सख्त होगी?

अब निगाहें इस बात पर हैं कि ब्रांड कंपनी और प्रशासन दोनों मिलकर इस रैकेट की जड़ें कब तक उजागर करते हैं।
क्योंकि अगर नकली दवा या पाउडर बाजार में यूँ ही बिकता रहा, तो अगला शिकार कोई भी हो सकता है — आप, हम, या हमारे परिवार के लोग।


🗣️ जनता की आवाज़

लोगों का कहना है — “हम भरोसे से दवा खरीदते हैं, लेकिन अब हर पैकेट पर शक होना लाज़मी है।”
यह वाकई सोचने वाली बात है कि एक नकली फैक्ट्री, असली सिस्टम को कितनी आसानी से धोखा दे गई।

यह मामला सिर्फ एक नकली फैक्ट्री का नहीं — बल्कि पूरे सिस्टम की पोल खोलने वाला आईना है।
जब तक प्रशासन कड़े कदम नहीं उठाता और उपभोक्ताओं को जागरूक नहीं किया जाता, तब तक बाजार में असली और नकली का फर्क मिटता रहेगा।

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