बरही प्रखंड के रीयाडा इलाके में स्थित राधागोपाल लोहा प्लांट में आज सुबह 5 बजे एक बार फिर फर्नेस विस्फोट की घटना सामने आई है। विस्फोट के बाद प्लांट प्रशासन ने पूरे परिसर को सील कर दिया और किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। यह घटना एक बार फिर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर रही है।
🧨 पहले भी हुए हैं ऐसे धमाके:
यह कोई पहली घटना नहीं है। बरही क्षेत्र के ही एक अन्य पवनपुत्र आयरन प्लांट में भी पूर्व में इसी तरह का धमाका हो चुका है। उस समय भी जांच के नाम पर सिर्फ कागजी कार्रवाई हुई थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ।
स्थानीय प्रशासन ने इस बार भी औपचारिकता निभाते हुए प्लांट का “निरीक्षण” किया, लेकिन अंदर की वास्तविक स्थिति अब भी एक रहस्य बनी हुई है।
🔍 प्रश्न उठते हैं:
- क्या प्लांट में फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं मौजूद हैं?
- क्या मजदूरों को सुरक्षा प्रशिक्षण दिया गया है?
- बार-बार होने वाले इन विस्फोटों पर कोई कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
🗣️ स्थानीय लोगों की नाराज़गी:
स्थानीय पार्षदों और जनप्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि—
“बरही में चल रहे कई लोहा संयंत्र जानलेवा साबित हो रहे हैं। हादसे के बाद हर बार जांच की बात होती है, लेकिन नतीजा शून्य रहता है। जब तक किसी की जान नहीं जाती, तब तक आवाज़ नहीं उठती।”
🚫 प्लांट के अंदर क्या हुआ? सच्चाई छिपाई जा रही है?
घटना के बाद से कोई मजदूर दिखाई नहीं दे रहा। न ही प्लांट प्रबंधन ने मीडिया को किसी प्रकार की जानकारी दी है। अंदर क्या हुआ, कितने लोग घायल हुए या कोई हताहत हुआ – इस पर पूरी तरह चुप्पी साध ली गई है।
🛑 अब जरूरी सवाल ये है:
“क्यों हो रहे हैं बार-बार फर्नेस ब्लास्ट?”
“क्या लोहा प्लांट मजदूरों के लिए मौत का कुआं बनते जा रहे हैं?”






