शुक्रवार को दारू अंचल कार्यालय में रिश्वतखोरी के एक मामले ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला दिया, जब एक राजस्व कर्मचारी को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया।
🔎 घटना का पूरा ब्यौरा
दारू अंचल कार्यालय में कार्यरत राजस्व कर्मचारी ज्ञानी राम ने एक ग्रामीण से जमीन की दाखिल-खारिज प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बदले ₹10,000 की रिश्वत मांगी थी।
पीड़ित ग्रामीण ने इस बात की शिकायत एसीबी से की, जिसके बाद टीम ने गुप्त रूप से जाल बिछाया।
जैसे ही ज्ञानी राम ने रिश्वत की पहली किश्त ₹3,000 स्वीकार की, टीम ने मौके पर ही उसे पकड़ लिया। पकड़े जाने के बाद कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई।
एसीबी की टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए अपने कार्यालय ले गई। बरामद रुपये को जब्त कर लिया गया है और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
⚖️ आरोपी और उसकी पृष्ठभूमि
गिरफ्तार ज्ञानी राम हजारीबाग के दारूटोला बक्शीडीह गांव के निवासी हैं। वे पहले राजस्व कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हो चुके थे, लेकिन बाद में अनुबंध पर दोबारा नियुक्त किए गए थे।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वे दारू अंचल कार्यालय में काफी समय से कार्यरत थे और भूमि से जुड़ी फाइलों के निपटान में विलंब के लिए बदनाम थे।
💬 पीड़ित की शिकायत
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने अपनी पत्नी के नाम जमीन की दाखिल-खारिज के लिए आवेदन दिया था, लेकिन ज्ञानी राम ने बिना घूस लिए फाइल आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।
जब शिकायत एसीबी तक पहुंची, तो टीम ने बिना देरी कार्रवाई की और आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया।
🚔 प्रशासनिक प्रतिक्रिया
एसीबी अधिकारियों ने बताया कि जांच में यदि किसी और कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो आगे और गिरफ्तारियां भी की जाएंगी।
वहीं, स्थानीय प्रशासन ने यह भी कहा है कि दारू अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार की पुरानी शिकायतें मिलती रही हैं, और अब इस गिरफ्तारी के बाद अन्य मामलों की भी समीक्षा की जाएगी।
⚠️ संभावित आगे की कार्रवाई
- आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।
- रिश्वतखोरी से जुड़े दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
- अगर आरोपी दोषी पाया गया, तो उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा और सख्त कानूनी सजा दी जाएगी।
🧩 संदेश और प्रभाव
इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अब शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जा रही है।
ऐसे मामलों से न केवल जनता का भरोसा टूटता है, बल्कि शासन की छवि भी धूमिल होती है।
हजारीबाग में यह घटना उन तमाम अधिकारियों के लिए चेतावनी है, जो जनता के अधिकारों के बदले रिश्वत लेने की प्रवृत्ति में लिप्त हैं।






