विधायक प्रकाश राम के सामने फूटा लोगों का गुस्सा, जमीन से लेकर योजनाओं तक में घूस मांगने के चौंकाने वाले खुलासे
बालूमाथ (लातेहार):
बालूमाथ प्रखंड कार्यालय परिसर में लातेहार विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रकाश राम द्वारा आयोजित जनता दरबार में भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतों ने सबको चौंका दिया। दरबार में पहुंचे दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि सरकारी योजनाओं और कागजी कार्यवाही के एवज में कर्मचारी से लेकर जेई तक खुलेआम रिश्वत मांगते हैं, और बिना पैसे दिए कोई भी काम आगे नहीं बढ़ता।
जमीन विवाद और घूसखोरी के मामलों ने मचाया हड़कंप
जनता दरबार में कुल 29 आवेदन जमीन से संबंधित मामलों में आए, जिनमें रकबा सुधार, दाखिल-खारिज, खतियान अद्यतन जैसे विषय शामिल थे। इसके अलावा अबुआ आवास, टीसीबी, मेड़बंदी योजना, और ऑनलाइन पेपर वर्क से जुड़े 21 मामलों में रिश्वत मांगे जाने की शिकायतें सामने आईं।
ग्रामीणों के आरोपों की बौछार
- सेरेगड़ा निवासी महेंद्र कुमार साहू ने राजस्व कर्मचारी विकास कुमार पर ₹5000 की रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए कहा कि उसकी जमीन का रकबा जीरो कर दिया गया, और उसे ठीक कराने के बदले पैसे मांगे गए। जब उसने देने से इनकार किया, तो उसका कार्य अधर में छोड़ दिया गया।
- झाबर के जगदीश यादव ने बताया कि गाय शेड निर्माण योजना की राशि को रिलीज़ कराने के बदले जेई मो. राशिद ने ₹1500 फोनपे के जरिए रिश्वत ली।
- गणेशपुर निवासी राजेश यादव ने आरोप लगाया कि कंप्यूटर ऑपरेटर ने हर व्यक्ति की डिमांड लगाने के लिए ₹700 प्रति व्यक्ति की मांग की, और जब उसने पैसा नहीं दिया, तो आज तक उसका डिमांड नहीं लगाया गया।
विधायक का सख्त संदेश: नहीं बख्शे जाएंगे भ्रष्ट कर्मचारी
विधायक प्रकाश राम ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कहा:
“जनता की योजनाओं में भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि तत्काल जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।“
उन्होंने यह भी कहा कि जनता दरबार का उद्देश्य ही यही है कि लोगों की वास्तविक समस्याएं सामने आ सकें और उनका समाधान हो।
प्रशासन की साख पर संकट
जनता दरबार में सामने आई इन शिकायतों ने प्रखंड कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही की तस्वीर को उजागर कर दिया है। यह स्थिति ग्रामीणों के लिए बेहद पीड़ादायक और निराशाजनक है, जो न्याय और अधिकार की आस में सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटते रहते हैं।
इस मामले में यदि सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो प्रशासन और सरकार की योजनाओं पर से जनता का भरोसा टूट जाएगा। अब देखना होगा कि इन शिकायतों पर प्रशासन कितना प्रभावी एक्शन लेता है।






