धनबाद: झारखंड के कोयला नगरी धनबाद में एक बड़े वाहन धोखाधड़ी घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें गुजरात की एक कंपनी पर करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप लगा है। यह मामला वैष्णवी ट्रांसपोर्ट नामक कंपनी से जुड़ा है, जिसने स्थानीय वाहन मालिकों को लुभावनी स्कीमों के झांसे में फंसाकर भारी नुकसान पहुंचाया।
क्या है पूरा मामला?
धनबाद में 40 से अधिक वाहन मालिकों ने आरोप लगाया है कि वैष्णवी ट्रांसपोर्ट ने उन्हें एक आकर्षक योजना के तहत ट्रक, पिकअप और अन्य कमर्शियल गाड़ियाँ फाइनेंस करवाने के लिए प्रेरित किया। कंपनी ने वादा किया था कि वे इन गाड़ियों का उपयोग अपने कॉन्ट्रैक्ट्स में करेंगी और वाहन मालिकों को हर महीने तय राशि (EMI से अधिक) का भुगतान करेगी। इसके अलावा गाड़ी की EMI भी समय पर चुकाई जाएगी।
शुरुआत में कंपनी ने कुछ महीनों तक भुगतान किया, जिससे विश्वास बढ़ा। लेकिन कुछ समय बाद अचानक भुगतान बंद हो गया और अब वाहन मालिकों के पास बैंकों से लोन न चुकाने के नोटिस आने लगे हैं। इस धोखाधड़ी से लाखों-करोड़ों की आर्थिक क्षति का अनुमान लगाया जा रहा है।
पीड़ितों की आपबीती
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने गाड़ियां फाइनेंस कराने के लिए अपनी ज़मीन गिरवी रखी, कर्ज़ लिए और जीवनभर की कमाई इस योजना में लगा दी। अब न तो उन्हें गाड़ियां मिल रही हैं और न ही कोई भुगतान। कई पीड़ितों की गाड़ियां भी गायब हैं और वे यह नहीं जानते कि वे फिलहाल कहां और किस हालत में हैं।
प्रशासन से गुहार
धोखाधड़ी के शिकार लोगों ने स्थानीय प्रशासन, जिला पुलिस और वाणिज्यिक बैंक अधिकारियों से शिकायत की है। वे मांग कर रहे हैं कि गुजरात की इस कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें उनका पैसा व गाड़ियां वापस दिलाई जाएं। कुछ पीड़ितों ने इस मामले को हाईकोर्ट तक ले जाने की बात भी कही है।
पुलिस जांच शुरू
धनबाद पुलिस ने प्रारंभिक शिकायतों के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार कंपनी के कई दस्तावेजों की जांच की जा रही है और गुजरात स्थित मुख्यालय से भी संपर्क साधा जा रहा है। पीड़ितों से लगातार बयान लिए जा रहे हैं और पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश की जा रही है।
यह मामला सिर्फ एक आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि आम जनता के विश्वास के साथ बड़ा खिलवाड़ है। अगर समय रहते दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति होती रहेगी। प्रशासन और न्यायपालिका से उम्मीद है कि पीड़ितों को जल्द न्याय मिलेगा।






