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आज़ादी के 78 साल बाद भी जमुनियतारी अंधेरे में — सत्ता में रहे जनप्रतिनिधियों की नाकामी उजागर

On: October 17, 2025 10:06 AM
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आज़ादी के 78 साल बाद भी जमुनियतारी अंधेरे में — सत्ता में रहे जनप्रतिनिधियों की नाकामी उजागर

हज़ारीबाग (चौपारण) — भारत आज़ादी के 78 साल पूरे कर चुका है। देश अंतरिक्ष तक पहुँच गया, डिजिटल इंडिया की मिसालें दी जा रही हैं, लेकिन झारखंड के चौपारण प्रखंड के जमुनियतारी पंचायत के लोगों की ज़िंदगी आज भी अंधेरे में है।
यहाँ न सड़क है, न पानी की सुविधा, न बिजली की स्थायी व्यवस्था। सवाल यह है — आख़िर इतने सालों तक जनप्रतिनिधि क्या करते रहे?


⚠️ विकास नहीं, सिर्फ वादे

जमुनियतारी और आसपास के गाँवों में दशकों से लोग बुनियादी सुविधाओं की मांग करते आ रहे हैं।
हर चुनाव में नेता आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं — “सड़क बनेगी”, “हर घर तक बिजली पहुँचेगी”, “पीने का पानी मिलेगा” —
लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता फिर उसी अंधेरे और धूल में छोड़ दी जाती है।

एक ग्रामीण ने तंज कसते हुए कहा —

“हमारे गाँव में नेता सिर्फ वोट मांगने आते हैं, लेकिन काम करने कोई नहीं आता।”


💔 बच्ची की मौत ने किया पर्दाफाश

हाल ही में जमुनियतारी की एक बच्ची की इलाज के अभाव में मौत हो गई।
गाँव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस नहीं पहुँच सकी, और परिजन बेबस देखते रह गए।

इसके बाद सोशल मीडिया पर क्षेत्र के कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों ने पोस्ट डालकर डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया,
लेकिन जनता ने पलटकर सवाल किया —

“जब आप 10 से 15 साल तक विधायक और पदाधिकारी रहे, तो आपने गाँव की सड़क, अस्पताल और पानी की व्यवस्था क्यों नहीं की?”


🔥 जनता का गुस्सा जनप्रतिनिधियों पर

गाँव के लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों ने वर्षों तक सत्ता का आनंद लिया,
लेकिन जनता को सिर्फ वादों और भाषणों से बहलाते रहे।

एक ग्रामीण महिला ने कहा —

“नेता अब सोशल मीडिया पर दिखा रहे हैं कि उन्हें दुख है, पर असली दुख तो हमें है,
क्योंकि हमारी बच्ची तो अब लौटेगी नहीं।”

लोगों ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि जनता के दुःख में अब सिर्फ फोटो खिंचवाने और बयान देने आते हैं।
गाँव की सच्चाई देखने कोई नहीं आता।


🕳️ जमीनी सच्चाई — “कागज़ पर विकास, ज़मीन पर वीरानी”

जमुनियतारी की हालत देखकर यह साफ़ है कि यहाँ विकास सिर्फ कागज़ पर हुआ है।

कई ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत में नाली और पेयजल योजना के लिए फंड आया,
लेकिन उसका जवाब या हिसाब किसी ने नहीं दिया।


🗣️ जवाबदेही से भागना बंद करें जनप्रतिनिधि

अब जनता यह मांग कर रही है कि जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच आकर जवाब देना चाहिए —

“डॉक्टर नहीं, असली जिम्मेदार वो हैं जिन्होंने सालों तक सत्ता में रहकर भी गाँव को अंधेरे में छोड़ दिया।”

जनता का गुस्सा साफ़ है — अब लोग भाषण नहीं, काम का सबूत चाहते हैं।


📢 अब जनता की चेतावनी

लोगों ने ऐलान किया है कि अगर आने वाले चुनाव तक बुनियादी सुविधाएँ नहीं दी गईं,
तो वे अगली बार किसी भी पुराने जनप्रतिनिधि को वोट नहीं देंगे।
गाँव में अब “काम देखो, चेहरा नहीं” अभियान शुरू करने की बात चल रही है।


📰 निष्कर्ष

आज़ादी के 78 साल बाद भी अगर चौपारण का जमुनियतारी गाँव सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं से वंचित है,
तो इसकी असली जिम्मेदारी उन जनप्रतिनिधियों की है जो सालों तक सत्ता में रहकर भी जनता की आवाज़ नहीं सुन सके।
अब जनता पूछ रही है —

“आख़िर विकास के नाम पर हमारे वोट कहाँ गए?”

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