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मुंबई में भाषा विवाद ने पकड़ा तूल! राज ठाकरे को खुली चुनौती देने वाले कारोबारी का ऑफिस बना निशाना — MNS कार्यकर्ताओं का पथराव, फिर मांगनी पड़ी माफी

On: July 6, 2025 5:08 AM
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मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति का पारा एक बार फिर भाषाई पहचान के मुद्दे पर चढ़ गया है। इस बार सीधा मामला राज ठाकरे और उनकी पार्टी मनसे (MNS) से जुड़ा है। एक बिजनेसमैन ने जब सोशल मीडिया पर मराठी को लेकर सवाल उठाया, तो बात बहस से बढ़कर हिंसक विरोध और पथराव तक जा पहुंची। नतीजा? ऑफिस पर हमला और अंत में माफीनामा।


🔥 ‘मुंबई सबकी है’ कहने की कीमत — टूटे कांच, डरी टीम, पुलिस केस!

मुंबई के अंधेरी इलाके में स्थित एक निजी कंपनी के मालिक ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा:

“मुंबई सिर्फ मराठी भाषियों की नहीं है — सबकी है। भाषा थोपना बंद करें!”

बस फिर क्या था — ये बयान MNS कार्यकर्ताओं को सीधा चैलेंज जैसा लगा और देखते ही देखते पार्टी के समर्थक बिजनेसमैन के ऑफिस पहुंच गए।

शोर-शराबा, नारेबाज़ी और फिर अचानक पथराव शुरू हो गया। शीशे टूटे, कर्मचारी सहमे, और इलाके में तनाव फैल गया।


🚔 पुलिस की फुर्ती — 5 MNS कार्यकर्ता हिरासत में

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और 5 मनसे कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो के आधार पर बाकियों की पहचान की जा रही है।

पश्चिमी ज़ोन के DCP ने कहा:

“कानून को हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी — चाहे वे किसी भी पार्टी से हों।”


🎥 माफी का वीडियो वायरल — “किसी की भावना आहत नहीं करना चाहता था”

हमले के कुछ घंटों बाद, वही बिजनेसमैन सामने आए — लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर माफी मांगते हुए।
वीडियो में उन्होंने कहा:

“मेरा इरादा किसी की भावनाएं ठेस पहुंचाने का नहीं था। अगर मेरे शब्दों से किसी को बुरा लगा हो तो मैं खेद प्रकट करता हूं।”

हालांकि सोशल मीडिया पर लोग दो हिस्सों में बंट गए — कुछ ने इसे “बुद्धिमानी भरा कदम” कहा, तो कुछ ने “दबाव में दी गई माफी”


🧍‍♂️ राज ठाकरे की चुप्पी पर उठे सवाल

पूरे विवाद में अब तक राज ठाकरे की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, लेकिन MNS के अंदरूनी सूत्रों का कहना है:

“मराठी अस्मिता पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा — पार्टी के स्टैंड में कोई बदलाव नहीं है।”


🗳️ राजनीति गर्माई, विपक्ष हमलावर

इस घटना को लेकर विपक्षी दलों ने MNS और सरकार दोनों पर निशाना साधा।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा:

“यह राज्य सरकार की नाकामी है कि लोग आज भी भाषा के नाम पर डराए जा रहे हैं। लोकतंत्र में असहमति का जवाब पत्थर नहीं, तर्क होता है।”


📌 Instakhabar की विशेष राय:

भाषा हमारी पहचान है, लेकिन हिंसा उसका सम्मान नहीं।
मुंबई जैसे महानगर में जहां हर बोली, हर जाति, हर धर्म के लोग रहते हैं — वहां भाषा को लेकर खड़े हुए विवाद समाज की एकता को तोड़ते हैं।

सवाल सिर्फ एक नहीं, कई हैं:

  • क्या अब भी हम भाषाई असहिष्णुता से ऊपर नहीं उठ पाए?
  • क्या विचार रखने की आज़ादी पर डर का साया है?
  • और क्या ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होगी, या फिर सब ‘मैनेज’ हो जाएगा?

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