झारखंड के लोहरदगा जिले में एक ऐसी वारदात सामने आई जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। महज़ अंधविश्वास और अफवाहों के कारण एक निर्दोष परिवार का सफाया कर दिया गया। यह घटना समाज में आज भी जिंदा उस अंधविश्वास की भयावह तस्वीर पेश करती है, जो लोगों को इंसान से हैवान बना देती है।
📍 घटना कहाँ और कब हुई
यह भयावह घटना पेशरार थाना क्षेत्र के केकरांग बरटोली गांव की है। बीती रात गांव के ही कुछ लोगों ने एक परिवार को “डायन” बताकर मौत के घाट उतार दिया।
मारे गए लोगों में पति लक्ष्मण नगेसिया (47 वर्ष), पत्नी बिफनी नगेसिया (45 वर्ष) और उनका 9 वर्षीय मासूम बेटा रामविलास नगेसिया शामिल हैं।
जब यह वारदात हुई, पूरा परिवार अपने घर में सो रहा था।
😢 कैसे हुई हत्या
रात के अंधेरे में हमलावरों ने घर में घुसकर तीनों पर कुदाल, पत्थर और धारदार हथियारों से हमला कर दिया।
इतना ही नहीं, आरोपियों ने वारदात के बाद घर को बाहर से बंद कर दिया, ताकि कोई मदद के लिए बाहर न निकल सके।
सुबह जब गांव वालों ने दरवाजा नहीं खुलते देखा, तो अंदर का खौफनाक नजारा देखकर सबकी रूह कांप गई — तीनों शव खून से लथपथ पड़े थे।
🧩 बचा हुआ सदस्य और उसका बयान
इस घटना में परिवार की बहू सुखमनिया नगेसिया किसी तरह बच गई। उसने बताया कि हमलावरों ने उसे कमरे में बंद कर दिया था, इसलिए वह जान बचाने में सफल रही।
सुखमनिया के अनुसार, कुछ लोग लंबे समय से उसके सास-ससुर पर “डायन” होने का आरोप लगाते थे। गांव में कई बार झगड़े और पंचायत भी हुई थी, लेकिन किसी ने इस तरह की हत्या की कल्पना नहीं की थी।
🚔 तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है —
- सुखनाथ नगेसिया (26 वर्ष)
- बिंदेश्वर नगेसिया (21 वर्ष)
- संचरवा नगेसिया (19 वर्ष)
तीनों आरोपी उसी गांव के रहने वाले हैं। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें लगता था कि यह परिवार “जादू-टोना” करता है और इसी अंधविश्वास के चलते उन्होंने यह भयानक कदम उठा लिया।
🔎 पुलिस जांच और बरामदगी
जांच में पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल कुदाल, खून से सने पत्थर और कपड़े बरामद किए हैं।
फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस घटना में और लोग शामिल थे या यह पूरी तरह से गांव के अंदर की साजिश थी।
⚖️ अंधविश्वास का खौफनाक चेहरा
यह घटना बताती है कि झारखंड के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी डायन-बिसाही जैसे अंधविश्वास जड़ें जमाए हुए हैं।
लोग बीमारियों या दुर्भाग्य का कारण महिलाओं को मान लेते हैं और फिर उन्हें सज़ा देने का अधिकार अपने हाथों में ले लेते हैं।
ऐसे मामलों में अब तक सैकड़ों निर्दोष लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
🔔 प्रशासन की कार्रवाई और आगे की राह
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
डीएनए और फोरेंसिक जांच के बाद आरोपियों पर हत्या, आपराधिक साजिश और अंधविश्वास विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने और गांव में जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
💬 निष्कर्ष
लोहरदगा की यह दर्दनाक वारदात एक गहरी सोच छोड़ जाती है —
21वीं सदी में कदम रख चुके समाज में आज भी अंधविश्वास इंसान की सोच पर हावी है।
जब तक शिक्षा और जागरूकता गांव-गांव तक नहीं पहुंचेगी, तब तक ऐसी त्रासदियां हमें बार-बार झकझोरती रहेंगी।






