देश में एक बार फिर नफरत की साजिश ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। जिस चाट वाले को ‘गुलफाम’ बताकर कुछ मीडिया चैनलों ने सनसनी फैलाई, TRP बटोरी, और हिंदू-मुस्लिम की खाई और गहरी कर दी — अब सच्चाई सामने आ गई है।
दरअसल, ये मामला उस समय सामने आया जब कुछ दिनों पहले एक वायरल वीडियो में ‘गुलफाम की चाय’ के पास ‘गुप्ता चाट भंडार’ को जानबूझकर गुलफाम बताकर नफरत फैलाने की कोशिश की गई। कुछ कथित ‘धर्म रक्षक’ मौके पर पहुंचे और दुकान बंद करवाने का दबाव बनाया गया।
लेकिन अब गुप्ता चाट भंडार के मालिक ने खुद सामने आकर सच्चाई बयां की है। उन्होंने बताया —
“मैं हिंदू हूं, मेरे पिताजी अशोक गुप्ता जी हैं। मेरी दुकान के 20 मीटर दूर गुलफाम नामक व्यक्ति की चाय की दुकान है। उसका स्कैनर अलग है, मेरा अलग। स्वामी यशवीर जी अपनी टीम के साथ आए थे, पहले मेरे यहां चाट खाई, फिर 20 मीटर दूर गुलफाम की दुकान से कुछ लिया। लेकिन TRP के भूखे मीडिया ने मुझे ही गुलफाम बता दिया।”
इस अफवाह के बाद दो ज़िंदगियाँ बर्बाद हो गईं। एक ओर गुप्ता जी के बीमार पिता को अस्पताल जाना पड़ा, वहीं दूसरी ओर गुलफाम, जो तीन बेटियों का पिता है, उसकी दुकान बंद करवा दी गई। अब वह घर पर बैठा है, मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुका है।
स्थानीय लोगों ने भी मीडिया की इस हरकत की निंदा की है और प्रशासन से मांग की है कि जो लोग जानबूझकर धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
अब सवाल उठता है –
क्या यही है ‘नया भारत’?
जहां सच्चाई की जगह टीआरपी की भूख, इंसानियत की जगह मजहब की दुकान, और रोटी कमाने वाले को दंगाई बताना आम बात बन चुकी है?
क्या गुलफाम की बेटियों को इस देश में सिर्फ इसलिए भूखा रहना पड़ेगा क्योंकि उसका नाम ‘गुलफाम’ है?
जब तक नफरत बिकती रहेगी, TRP के सौदागर सच्चाई को कुचलते रहेंगे।
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