हजारीबाग – “सबका साथ, सबका विकास” और “गांव-गांव तक विकास” जैसे सरकारी दावों की सच्चाई झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के गिधनिया गांव ने एक बार फिर सामने ला दी है। यहां एक मजदूर की मौत के बाद उसका शव खाट पर रखकर परिजनों को 5 किमी पैदल जंगल और नदी पार कर गांव लाना पड़ा।
सरकार जहां अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य, सड़क और एंबुलेंस सेवा पहुंचाने की बात करती है, वहीं गिधनिया जैसे गांव आज भी विकास की बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
🔴 क्या है मामला?
गांव के निवासी शनिचर मरांडी की दो अगस्त को कर्नाटक में मजदूरी के दौरान मौत हो गई थी। उनका शव एक दिन बाद यानी तीन अगस्त को एंबुलेंस से विष्णुगढ़ के चितरामो तक लाया गया, लेकिन वहां से आगे कोई सड़क या वाहन की सुविधा नहीं होने के कारण परिजनों को शव को खटिया पर रखकर पांच किलोमीटर पैदल चलकर गांव लाना पड़ा।
गांव तक का रास्ता जंगलों, उबड़-खाबड़ पगडंडियों और नदी के बीच से होकर गुजरता है। इस दौरान परिजनों के साथ गांव के कुछ लोग शव को बारी-बारी से कंधे पर उठाकर लाते रहे।
परिजनों और ग्रामीणों के चेहरे पर केवल दुःख ही नहीं, बल्कि व्यवस्था और सरकारी वादों के प्रति गुस्सा और निराशा साफ झलक रही थी।
🛑 विकास के दावों की खुली पोल
गिधनिया गांव आज भी न तो सड़क से जुड़ा है, न वाहन की सुविधा उपलब्ध है और न ही स्वास्थ्य सेवा। बरसात के समय हालात और भी बदतर हो जाते हैं।
वार्ड सदस्य हेमंती देवी बताती हैं कि गांव से चितरामो तक जाने के लिए लोगों को नदी, कीचड़ और पगडंडी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार गर्भवती महिला या बीमार व्यक्ति को भी खटिया पर लादकर लाना पड़ता है।
🗳️ हर चुनाव में वादे, पर कोई काम नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि हर चुनाव में नेता सड़क बनवाने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वे दोबारा गांव की तरफ झांकते तक नहीं। कुछ महीने पहले उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा गया था, जिसके बाद सर्वे टीम आई, लेकिन उसके बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला गया।
💬 क्या कहते हैं प्रशासन के अधिकारी?
विष्णुगढ़ के बीडीओ अखिलेश कुमार ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो गांव में सड़क निर्माण सहित अन्य विकास कार्यों को लेकर गंभीर पहल की जाएगी।
लेकिन सवाल उठता है कि जब तक मीडिया या कोई बड़ी घटना सामने न आए, तब तक प्रशासन इन दुर्गम और उपेक्षित गांवों की सुध क्यों नहीं लेता?
⚠️ गांव की दुर्दशा पर कुछ कड़वे सवाल:
- जब शव तक को एंबुलेंस से नहीं पहुंचाया जा सकता, तो बीमार और गर्भवती महिलाओं का क्या होता होगा?
- क्या “डिजिटल इंडिया” और “स्मार्ट विलेज” की बातें सिर्फ शहरी एजेंडा तक सीमित हैं?
- कब तक ग्रामीण झूठे वादों, सर्वे और घोषणाओं के भरोसे रहेंगे?
📢 ग्रामीणों की मांग:
- पक्की सड़क निर्माण की तत्काल व्यवस्था
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना
- आपातकालीन वाहनों की पहुँच सुनिश्चित करना
- स्थायी जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करना






