रांची |
झारखंड की राजनीति में हलचल तेज़ हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 7 राजनीतिक दलों को रजिस्ट्रेशन सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये वे दल हैं जो पिछले 6 वर्षों से किसी भी चुनावी रणभूमि में नजर नहीं आए — न लोकसभा, न विधानसभा, न ही स्थानीय निकाय चुनावों में।
अब इन पार्टियों पर डीलिस्टिंग की तलवार लटक रही है। चुनाव आयोग ने सभी सात दलों को नोटिस भेजते हुए 15 जुलाई तक जवाब और शपथपत्र देने का निर्देश दिया है। इसके बाद अंतिम सुनवाई 22 जुलाई को होगी।
🔍 क्यों उठाया गया ये सख्त कदम?
चुनाव आयोग के मुताबिक, इन दलों ने:
- 6 वर्षों से कोई चुनाव नहीं लड़ा
- आयोग को कोई वर्षीय रिपोर्ट या गतिविधि विवरण नहीं सौंपा
- और राजनीतिक गतिविधियों में कोई सक्रियता नहीं दिखाई
इसलिए यह संदेह गहराया कि ये दल अब अस्तित्व में ही नहीं हैं या महज़ नाम मात्र के लिए बने हुए हैं।
“राजनीति में पारदर्शिता और सक्रिय भागीदारी जरूरी है, न कि केवल नाम का झंडा”, आयोग के सूत्रों ने कहा।
🗓️ क्या है आगे की प्रक्रिया?
- 15 जुलाई 2025: सभी सात दलों को अपना पक्ष लिखित रूप में शपथपत्र के साथ देना होगा
- 22 जुलाई 2025: आयोग द्वारा सुनवाई की जाएगी
- जवाब न देने पर स्वतः रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा
⚠️ डीलिस्टिंग का असर क्या होगा?
अगर पंजीकरण रद्द हुआ:
- दल किसी भी चुनाव में आधिकारिक रूप से हिस्सा नहीं ले सकेंगे
- चुनाव चिन्ह, सरकारी सुविधा और चुनावी फंडिंग से हाथ धो बैठेंगे
- भविष्य में सक्रिय होने पर पुनः पंजीकरण कराना होगा
🧭 राजनीतिक विश्लेषण क्या कहता है?
राजनीतिक पंडितों के अनुसार, यह कदम झारखंड की राजनीति को शुद्ध और सक्रिय बनाने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण फैसला है। इससे “कागजी दलों” को हटाकर वास्तविक और सक्रिय जनप्रतिनिधियों को जगह मिल सकेगी।
इससे पहले भी देशभर में कई निष्क्रिय दलों का रजिस्ट्रेशन समाप्त किया गया है — यह झारखंड में उस प्रक्रिया की अगली कड़ी है।











